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चुनाव आयोग, एसआईआर और जमुई मामले पर टीएमसी के दोनों गुटों के नेताओं ने दीं प्रतिक्रियाएं

नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। चुनाव आयोग से जुड़े विवाद, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया (एसआईआर) और बिहार के जमुई छेड़छाड़ मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और उससे अलग हुई डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। दोनों दलों ने चुनाव आयुक्तों की भूमिका, कानून-व्यवस्था और संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर अपने-अपने रुख स्पष्ट किए हैं।
 

नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। चुनाव आयोग से जुड़े विवाद, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया (एसआईआर) और बिहार के जमुई छेड़छाड़ मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और उससे अलग हुई डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। दोनों दलों ने चुनाव आयुक्तों की भूमिका, कानून-व्यवस्था और संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर अपने-अपने रुख स्पष्ट किए हैं।

डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कोलकाता में पार्टी के चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर कहा कि इस मामले में हाई कोर्ट चुनाव आयोग से बात करेगा और पार्टी इस पर फिलहाल कुछ नहीं कह सकती। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी के लिए किसी एक विधायक के नाम पर कोई तय चुनाव चिह्न नहीं होता, बल्कि संबंधित चुनाव चिह्न ‘फ्री सिंबल’ था।

रिजु दत्ता के मुताबिक, उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग से तीन चुनाव चिह्न मांगे थे। उन्होंने कहा कि इन तीन विकल्पों में से आयोग ने पार्टी को लिफाफे वाला चुनाव चिह्न आवंटित किया। उन्होंने इस मामले में न्यायिक और चुनावी प्रक्रिया का पालन किए जाने की बात कही।

चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी रिजु दत्ता ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि न तो भारत और न ही पश्चिम बंगाल किसी एक व्यक्ति की इच्छा के अनुसार चलता है और सभी फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत होते हैं।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की गई थी। रिजु दत्ता ने कहा कि वोट चोरी हुई है या नहीं, यह एक ऐसा सवाल है जिसे साबित करने में समय लगेगा। उन्होंने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन किए जाने पर जोर दिया।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने जमुई के छेड़छाड़ मामले को बिहार की कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा कि जमुई में जो हुआ, उसी तरह की घटनाएं बिहार में सामने आ रही हैं और उनके अनुसार राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है।

महुआ मोइत्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव पहले ही पेश किया जा चुका है और उस समय आवश्यक 50 हस्ताक्षरों के मुकाबले 70 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर थे। उन्होंने दावा किया कि यह प्रस्ताव अभी लंबित है।

महुआ मोइत्रा ने ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की। 2023 में केंद्र सरकार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून पारित किए जाने का भी उल्लेख किया।

कोलकाता में टीएमसी सांसद डोला सेन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पहले ही इस मुद्दे पर चिंता जता चुकी है।

डोला सेन ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने मतदाता सूची से 92 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने और उनके मामलों के निपटारे को लेकर कई बार सवाल उठाए हैं। एसआईआर के नाम पर चुनाव आयोग का व्यवहार भाजपा के एक ‘फ्रंटल संगठन’ जैसा दिखाई दे रहा है।

डोला सेन ने कहा कि अब कई विपक्षी दल भी इसी तरह की चिंताएं जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि अन्य राजनीतिक दल और नागरिक संगठन भी इस मुद्दे को उठा रहे हैं तो यह स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा, “देर आए, दुरुस्त आए।”

--आईएएनएस

एसएके/डीकेपी