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थाना दिवसः जनसुनवाई के दौरान पर 116 का शिकायतों का पुलिस ने मौके पर किया निपटारा

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। 'थाना दिवस' के मौके पर 18 जुलाई को मध्य दिल्ली के सभी पुलिस स्टेशनों में 'जन सुनवाई' का आयोजन किया गया। इस दौरान 116 शिकायतों का तुरंत निपटारा किया गया, जबकि बाकी शिकायतों पर वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में तेजी से कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।
 

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। 'थाना दिवस' के मौके पर 18 जुलाई को मध्य दिल्ली के सभी पुलिस स्टेशनों में 'जन सुनवाई' का आयोजन किया गया। इस दौरान 116 शिकायतों का तुरंत निपटारा किया गया, जबकि बाकी शिकायतों पर वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में तेजी से कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।

जन शिकायत निवारण कार्यक्रम की देखरेख एडिशनल डीसीपी प्रथम और असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस ने की। उन्होंने संबंधित पुलिस स्टेशनों पर शिकायतकर्ताओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनकी बातें सुनीं। हर शिकायत की बारीकी से जांच की गई और नागरिकों को वरिष्ठ अधिकारियों के सामने सीधे अपनी चिंताएं रखने का मौका दिया गया। जहां भी संभव हुआ, शिकायतों का समाधान किया गया और मौके पर ही उचित कार्रवाई की गई। जिन मामलों में आगे की जांच की जरूरत थी, उन्हें तय प्रक्रियाओं के अनुसार तेजी से आगे की कार्रवाई के लिए लिया गया।

जन सुनवाई के दौरान कुल 133 शिकायतकर्ताओं की बातें सुनी गईं। इस दौरान 116 शिकायतों का समाधान किया गया जबकि बाकी मामलों को वरिष्ठ अधिकारियों की कड़ी निगरानी में तेजी से समाधान के लिए चिह्नित किया गया, ताकि उनका समय पर और प्रभावी ढंग से निपटारा हो सके।

इस कार्यक्रम में लोगों की उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिली, जो सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस की शिकायत निवारण प्रणाली में नागरिकों के बढ़ते भरोसे और विश्वास को दर्शाता है। यह पुलिस और समुदाय के बीच रचनात्मक बातचीत के लिए एक प्रभावी मंच भी साबित हुआ। इससे अधिकारियों को स्थानीय चिंताओं को बेहतर ढंग से समझने, जनता का भरोसा मजबूत करने और शांति, कानून-व्यवस्था व सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने के प्रयासों को और मजबूत करने में मदद मिली।

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस पेशेवर, पारदर्शी, जवाबदेह और सेवा-उन्मुख पुलिसिंग प्रदान करने के अपने संकल्प पर अडिग है। 'थाना दिवस जन सुनवाई' का नियमित आयोजन पुलिस-जनता की साझेदारी को मजबूत करता है। यह पहुंच को आसान बनाता है, पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है और पूरे जिले में संवेदनशील व नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग सुनिश्चित करता है।

--आईएएनएस

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