तेजस मार्क-1ए को लेकर अप्रैल के आखिरी हफ्ते में आईएएफ और एचएएल के बीच बड़ी बैठक, डिलीवरी को लेकर साफ होगी तस्वीर
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। तेजस मार्क 1ए का इंतज़ार भारतीय वायुसेना बड़ी शिद्दत से कर रही है। डिलीवरी की डेडलाइन कई बार मिस हो चुकी है, लेकिन अप्रैल के आखिरी हफ्ते में तेजस मार्क 1ए की डिलीवरी को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना और तेजस निर्माता एचएएल के बीच एक अहम बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में तेजस मार्क 1ए के मेजर, माइनर और अनिवार्य ऑपरेशनल जरूरतों की प्रगति पर चर्चा की जाएगी।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, अगर एचएएल अनिवार्य ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा कर देता है तो तेजस की डिलीवरी की तारीख भी तय हो सकती है। वहीं, यदि ये जरूरतें पूरी नहीं होती हैं तो डिलीवरी में फिर देरी हो सकती है। इस बैठक के नतीजे काफी हद तक तय करेंगे कि एचएएल पहला एयरक्राफ्ट वायुसेना को कब तक सौंप सकता है। तेजस मार्क-1ए को एएसक्यूआर (एयर स्टाफ क्वालिटी रिक्वायरमेंट) पर खरा उतरना होगा। यानी कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक जो एएसक्यूआर फाइनल किए गए थे, उन पर विमान को खरा उतरना जरूरी है। किसी भी एयरक्राफ्ट को तैयार होने और वायुसेना में शामिल होने में समय लगता है। इसकी वजह है भारतीय वायुसेना द्वारा निर्धारित मानकों पर होने वाली सख्त जांच।
एचएएल द्वारा दिए जा रहे एयरक्राफ्ट को पहले एएसक्यूआर पर खुद को साबित करना होगा, उसके बाद ही वायुसेना में उसकी एंट्री होगी। एयर स्टाफ क्वालिटी रिक्वायरमेंट एक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसमें एयरक्राफ्ट के तकनीकी और ऑपरेशनल जरूरतों का पूरा ब्लूप्रिंट होता है।
फैक्ट्री से बाहर आने के बाद वायुसेना की तकनीकी टीम इस एयरक्राफ्ट का निरीक्षण करेगी और टेस्ट पायलट इसकी उड़ान भरेंगे। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विमान एएसक्यूआर के मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। निरीक्षण के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यदि कोई कमी पाई जाती है तो एचएएल को उसे दुरुस्त करने के लिए कहा जाएगा। इसके बाद ही भारतीय वायुसेना को पहला तेजस मार्क 1ए मिलने का रास्ता साफ होगा।
तेजस प्रोग्राम अब तक धीमी गति से आगे बढ़ रहा था, जिसकी एक मुख्य वजह इंजन की डिलीवरी में देरी भी थी। हालांकि अब धीरे-धीरे इंजन मिलने शुरू हो गए हैं। तेजस मार्क 1ए प्रोग्राम के लिए इंजन की डील अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) के साथ साल 2021 में हुई थी। इस समझौते के तहत कुल 99 एफ404 इंजन भारत को मिलने हैं।
फाइटर जेट की डिलीवरी में देरी को लेकर भारतीय वायुसेना प्रमुख ने भी नाराजगी जताई थी। तेजस के कई वेरिएंट हैं- तेजस मार्क-1, तेजस मार्क 1ए और तेजस ट्रेनर एयरक्राफ्ट और तेजस मार्क-2, जो सबसे एडवांस वर्जन होगा, उस पर काम जारी है।
मौजूदा सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से भारतीय वायुसेना के पास 42 फाइटर स्क्वॉड्रन की जरूरत है, लेकिन फिलहाल वह सिर्फ 29 स्क्वॉड्रन के साथ काम चला रही है। इस कमी को तेजस के जरिए पूरा किया जाना है। वायुसेना पहले ही 40 में से 38 तेजस विमान शामिल कर चुकी है। एचएएल से 83 एलसीए तेजस मार्क-1ए की डील हुई, लेकिन अब तक उनकी डिलीवरी शुरू नहीं हो सकी है। इन 83 तेजस मार्क 1ए से कुल 4 स्क्वॉड्रन बनेंगे। इसके अलावा 5 अतिरिक्त स्क्वॉड्रन के लिए 97 तेजस मार्क 1ए की खरीद की डील भी हो चुकी है।
तेजस के कुल 11 स्क्वॉड्रन में से 2 पहले ही शामिल हो चुके हैं, जबकि 9 अभी शामिल होने बाकी हैं।
--आईएएनएस
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