तीनों सेनाओं की एकजुटता से सुरक्षा चुनौतियों को जवाब दे सकते हैं: नौसेना प्रमुख
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडियन आर्मी के टॉप कमांडर्स की कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय नौसेना प्रमुख ने कहा कि तीनों सेनाओं की एकजुटता से सुरक्षा की चुनौतियों का जवाब दे सकते हैं। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का कहना है कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। तेजी से बदलते इन युद्धों में अब नई और उभरती तकनीकों का उपयोग बढ़ता जा रहा है।
दरअसल साइबर युद्ध, ड्रोन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्र अब युद्ध के महत्वपूर्ण आयाम बन चुके हैं। नौसेना प्रमुख ने कहा कि सशस्त्र बलों को नई चुनौतियों के प्रति अधिक सजग और तैयार रहने की आवश्यकता है।
नौसेना प्रमुख सोमवार को यहां आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में पहुंचे और सैन्य कमांडर्स को संबोधित किया। इस दौरान थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी मौजूद रहे। नौसेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं यानी थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल (त्रि-सेवा समन्वय) की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समकालीन सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी समाधान तभी संभव है, जब सभी सेनाएं एकीकृत दृष्टिकोण के साथ कार्य करें। इस दिशा में थिएटराइजेशन (थिएटर कमांड की अवधारणा) को एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी।
आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 13 अप्रैल को नई दिल्ली में प्रारंभ हुई और यह महत्वपूर्ण सैन्य कॉन्फ्रेंस 16 अप्रैल तक चलेगी। आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में देश की सुरक्षा स्थिति, भविष्य की रणनीति और सैन्य समन्वय पर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है।
यह सम्मेलन भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य के लिए नीतिगत दिशा तय की जाती है।
सम्मेलन के दौरान भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का मार्गदर्शन किया। नौसेना प्रमुख ने वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र की रणनीतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि समुद्री संचार मार्गों व ऊर्जा और व्यापार की निर्बाध आपूर्ति बनी रहना आवश्यक है। भारतीय नौसेना की सक्रिय भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि नौसेना महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों की सुरक्षा के लिए निरंतर सतर्क और तत्पर है।
आर्मी कमांडर्स’ कॉन्फ्रेंस में सैन्य नेतृत्व न केवल वर्तमान खतरों का आकलन कर रहा है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक योजनाएं भी तैयार कर रहा है। इसमें सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, तकनीकी आधुनिकीकरण और संयुक्त अभियानों की क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विशेष चर्चा हो रही है।
यह सम्मेलन एक ‘फ्यूचर-रेडी’ भारतीय सेना के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जहां आधुनिक तकनीक, समन्वित रणनीति और त्वरित निर्णय क्षमता के माध्यम से देश की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
गौरतलब है कि भारतीय नौसेना के टॉप कमांडर की भी एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस है 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी।
यहां नौसेना के कमांडर्स समुद्री सुरक्षा, परिचालन तैयारियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रणनीतिक दिशा तय करेंगे। इसमें नौसेना का शीर्ष नेतृत्व, ऑपरेशनल कमांडर और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। भारतीय नौसेना द्वारा कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026 का यह पहला संस्करण आयोजित किया जा रहा है।
--आईएएनएस
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