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शिक्षक दिवस पर केरल के मंत्री रोजी एम. जॉन बोले, शिक्षा में इंसानियत और समानता जरूरी

तिरुवनंतपुरम, 5 सितंबर (आईएएनएस)। केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन की शिक्षक दिवस पर की गई फेसबुक पोस्ट से विवाद खड़ा हो गया है। पोस्ट में उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से डॉ. राम की आलोचना की। डॉ. राम को दलित बीडीएस छात्र नितिन राज की आत्महत्या के बाद गिरफ्तार किया गया था। नितिन को डॉ. राम की ओर से जातिगत उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। रोजी एम. जॉन ने आरएसएस की बैठकों में शामिल होने के लिए वाइस चांसलर की भी आलोचना की।
 

तिरुवनंतपुरम, 5 सितंबर (आईएएनएस)। केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन की शिक्षक दिवस पर की गई फेसबुक पोस्ट से विवाद खड़ा हो गया है। पोस्ट में उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से डॉ. राम की आलोचना की। डॉ. राम को दलित बीडीएस छात्र नितिन राज की आत्महत्या के बाद गिरफ्तार किया गया था। नितिन को डॉ. राम की ओर से जातिगत उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। रोजी एम. जॉन ने आरएसएस की बैठकों में शामिल होने के लिए वाइस चांसलर की भी आलोचना की।

रोजी एम. जॉन ने अपने पोस्ट में कहा, "आज हम भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद में शिक्षक दिवस मना रहे हैं। वे सत्ता के ऊंचे पदों के बजाय शिक्षण की अच्छाई में विश्वास रखते थे। उन्होंने कहा था कि उनके जन्मदिन को व्यक्तिगत रूप से मनाने के बजाय देश के सभी शिक्षकों को समर्पित किया जाए।"

उन्होंने कहा, "रवींद्रनाथ टैगोर के शांति निकेतन और विश्व-भारती ने कक्षा की चार दीवारों से परे की विशाल दुनिया को ही एक कक्षा में बदल दिया। एपीजे अब्दुल कलाम अपनी आखिरी सांस तक युवा मस्तिष्कों से जुड़े रहे और धरती पर केवल एक शिक्षक के रूप में लौटना चाहते थे। इन सभी ने आने वाली पीढ़ियों को सपने देखने और आसमान की ऊंचाइयों को छूने का साहस दिया। केरल में भी यह शानदार परंपरा जारी रही। सुकुमार अझिकोड ने कक्षा के अंदर और बाहर विचारों की आंधी पैदा की। ओएनवी ने काव्य भाषा के माध्यम से चमत्कार किए। एमजीएस नारायणन इतिहास को दिल के करीब लाए। प्रो. एम. लीलावती ने साहित्य को आत्मा से जोड़ा। इन सभी ने सवाल करने, चुनौती देने, सुधारने और खुद सुधरने का साहस जगाने की कोशिश की। साथ ही उन्होंने बड़े दिल और मानवता का पाठ भी पढ़ाया।"

रोजी एम. जॉन ने अपने पोस्ट में कहा, "जिन लोगों ने स्टाफ रूम में बैठकर किसी छात्र को उसकी जाति के नाम से बुलाकर अपमानित किया और उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया, वे शिक्षण के असली मकसद को नहीं समझ पाए। वे यह नहीं समझ पाए कि पढ़ाने का काम क्लासरूम के जरिए संवेदनशील और अच्छे इंसान बनाना है। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि हर शिक्षक की पहली जिम्मेदारी बिना किसी भेदभाव के आने वाली पीढ़ियों को अपनाना है।"

मंत्री ने कहा, "एक लोकतांत्रिक समाज के लिए यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है कि उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रमुख को अपने पद की गरिमा भूलकर ऐसे संगठनों के मंचों तक सीमित हो जाएं जो बांटने वाली सोच को बढ़ावा देते हैं। ऐसी प्रवृत्तियां, जो संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए शैक्षणिक आजादी के अधिकार को छोड़ देती हैं, शिक्षा क्षेत्र और खुद शिक्षण के मूल मकसद पर ही सवाल उठाती हैं। मेरे उन सभी प्यारे शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं, जो ज्ञान के जरिए अंधेरा दूर करते हैं और हमें संवैधानिक मूल्यों और इंसानियत को दिल के करीब रखने की सीख देते हैं।

--आईएएनएस

ओपी/वीसी