तस्लीमा नसरीन के बंगाल दौरे पर दिलीप घोष ने विपक्ष को दिया जवाब, टीएमसी नेता को बताया 'भोंपू'
कोलकाता, 20 जुलाई (आईएएनएस)। लेखिका तस्लीमा नसरीन के पश्चिम बंगाल दौरे पर विवाद को लेकर राज्य सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वैध वीजा व पासपोर्ट होने और सरकार की अनुमति के बाद कोई कहीं भी जा सकता है, लेकिन हम वह दिन नहीं भूले हैं जब तस्लीमा नसरीन को अपमानित करके यहां से जाने पर मजबूर किया गया था।
लेखिका तस्लीमा नसरीन के पश्चिम बंगाल दौरे पर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "जिसके पास वैलिड वीजा और पासपोर्ट हो, वह कहीं भी जा सकता है। अगर सरकार इजाजत दे, तो वे कहीं भी जा सकते हैं। लेकिन यहां कुछ ऐसे लोग थे जिन्होंने खुद को सेक्युलर बताते हुए सब कुछ कट्टरपंथियों और आतंकवादियों के हवाले कर दिया।"
उन्होंने कहा, "हम वह दिन नहीं भूले हैं जब तस्लीमा नसरीन को अपमानित करके यहां से जाने पर मजबूर किया गया था। और पूरे रास्ते आगजनी हुई, दंगे हुए, जिससे बांग्लादेश जैसे हालात बन गए। लोग रात में घर नहीं पहुंच पाए। स्कूल के बच्चे बिना कुछ खाए इधर-उधर भटक रहे थे। हजारों गाड़ियों में आग लगा दी गई। कोलकाता के वह दृश्य अभी भी याद हैं।"
उन्होंने दावा किया कि यह सब कुछ सीपीएम ने कराया था। जब सीएए पारित हुआ, तब पूरे पश्चिम बंगाल में आग लगाई गई। मंदिर, भाजपा कार्यालय और रेल-बस सब फूंक दिए गए थे। ऐसा करने वाले सभी वही लोग थे, जो घुसपैठ करके आए थे। इन घुसपैठियों के वोट से ही विपक्षी पार्टियां चुनाव जीता करती थीं।
दिलीप घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ है और घुसपैठियों का सफाया हुआ है। बचे हुए लोग सिर्फ आलोचना कर सकते हैं, इसके अलावा वे कुछ नहीं कर सकते हैं।
लेखिका तस्लीमा नसरीन को लेकर टीएमसी नेता सिद्दीकुल्लाह चौधरी के बयान पर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "सिद्दीकुल्लाह चौधरी भोंपू हैं। वे दूसरे की बातों पर बाजते हैं। टीएमसी के समय में उन्होंने बहुत कुछ किया, अब उनसे चुपचाप बैठने को कहें। सरकार सभी को सुरक्षा देगी और जो कोई भी कानून के दायरे से बाहर जाकर कुछ करेगा, उसे समझ लेना चाहिए कि क्या होने वाला है। कुछ घटनाएं हुई हैं और सभी के साथ उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।"
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के इस बयान पर कि अगर बागी सांसद पार्टी में लौटते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे, मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अब इस बारे में सोचने का क्या मतलब है?"
संसद में पेश किए जाने वाले 'वंदे मातरम' बिल पर मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "यह कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि राष्ट्रगीत गाने के लिए भी एक बिल लाना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इतने सालों से यहां राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान का अपमान करना एक चलन बन गया था। इसलिए, यहां के लोगों को यह समझना चाहिए कि किसी को भी राष्ट्रगीत का अपमान करने का अधिकार नहीं है। जो संसद में गाया जाता है, आज उसे हर जगह, हर स्कूल में गाना अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन उसका सम्मान सबसे ऊपर है। जो लोग इसे नहीं समझते, उन्हें समझाने के लिए ही कानून बनाया जा रहा है।"
--आईएएनएस
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