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तनाव और बेचैनी से छुटकारा दिलाने में फायदेमंद शून्य मुद्रा, कानों की परेशानी से भी मिलती है राहत

नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग स्वस्थ रहने के लिए तरह-तरह के उपाय अपनाते हैं। कोई जिम जाता है, कोई सुबह टहलता है, तो कोई योग का सहारा लेता है। योग में केवल आसन ही नहीं होते, बल्कि कई ऐसी हस्त मुद्राएं भी होती हैं, जिन्हें करने से शरीर और मन को फायदा पहुंचता है। इन्हीं में से एक है शून्य मुद्रा। यह एक आसान योग मुद्रा है, जिसे कहीं भी बैठकर किया जा सकता है।
 
तनाव और बेचैनी से छुटकारा दिलाने में फायदेमंद शून्य मुद्रा, कानों की परेशानी से भी मिलती है राहत

नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग स्वस्थ रहने के लिए तरह-तरह के उपाय अपनाते हैं। कोई जिम जाता है, कोई सुबह टहलता है, तो कोई योग का सहारा लेता है। योग में केवल आसन ही नहीं होते, बल्कि कई ऐसी हस्त मुद्राएं भी होती हैं, जिन्हें करने से शरीर और मन को फायदा पहुंचता है। इन्हीं में से एक है शून्य मुद्रा। यह एक आसान योग मुद्रा है, जिसे कहीं भी बैठकर किया जा सकता है।

शून्य मुद्रा को करने का तरीका बहुत आसान है। सबसे पहले पद्मासन में बैठ जाएं। इसके बाद, दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। अब मध्यमा उंगली को मोड़कर अंगूठे से हल्के दबाव के साथ पकड़ें। बाकी उंगलियों को सीधा रखें। इस दौरान सांस सामान्य रखें और मन को शांत रखने की कोशिश करें। कुछ मिनट तक इस मुद्रा में रहने के बाद धीरे-धीरे हाथों को सामान्य स्थिति में ले आएं।

योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, शून्य मुद्रा का सबसे ज्यादा फायदा कानों के लिए माना जाता है। कहा जाता है कि यह शरीर में ऊर्जा के संतुलन को बेहतर बनाने में मदद करती है। जब शरीर का संतुलन ठीक रहता है तो कानों से जुड़ी कुछ सामान्य परेशानियों में आराम मिल सकता है।

यह मुद्रा गले के लिए भी अच्छी मानी जाती है। जो लोग ज्यादा बोलते हैं, गाना गाते हैं या जिनका काम लगातार बोलने का है, उनके लिए यह उपयोगी है। इस मुद्रा को करते समय शरीर और मन दोनों शांत रहते हैं, जिससे गले की मांसपेशियों को आराम मिलता है। कई योग प्रशिक्षकों का मानना है कि इससे आवाज को साफ और बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

शून्य मुद्रा का असर केवल शरीर पर ही नहीं बल्कि मन पर भी पड़ता है। आजकल तनाव और चिंता की समस्या बहुत आम हो गई है। ऐसे में जब कोई व्यक्ति कुछ मिनट शांत बैठकर इस मुद्रा का अभ्यास करता है, तो उसका ध्यान इधर-उधर की बातों से हटकर अपने ऊपर केंद्रित होता है। इससे मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। यही कारण है कि इसे मानसिक शांति के लिए भी अच्छा माना जाता है।

इस मुद्रा को करने से शरीर में खून का बहाव भी बेहतर होने में मदद मिलती है। जब व्यक्ति आराम से बैठकर गहरी और सामान्य सांस लेता है तो शरीर को सुकून मिलता है। इससे शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक खून पहुंचने की प्रक्रिया बेहतर होती है। अच्छा रक्त संचार शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सांस से जुड़ी परेशानियों में भी यह मुद्रा सहायक मानी जाती है। अभ्यास के दौरान व्यक्ति अपनी सांसों पर ध्यान देता है, जिससे सांस लेने की आदत बेहतर हो सकती है। नियमित अभ्यास से शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन मिलने में मदद मिल सकती है।

हालांकि इस मुद्रा को करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। खाना खाने के तुरंत बाद इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। अगर अंगूठे या मध्यमा उंगली में दर्द, चोट या कोई परेशानी हो तो इसे करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

--आईएएनएस

पीके/एएस