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तमिल निर्देशक भारतीराजा की बिगड़ी तबीयत, फेफड़ों में गंभीर संक्रमण के चलते सीसीयू में भर्ती

मुंबई, 5 जनवरी (आईएएनएस)। तमिल सिनेमा के दिग्गज निर्देशक भारतीराजा की सेहत को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। उम्र के इस पड़ाव पर उनकी बिगड़ती तबीयत और बीते समय में झेले गए निजी दुखों ने उनके प्रशंसकों की बेचैनी और बढ़ा दी है। हाल के दिनों में उनकी सेहत को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिनके बीच अब अस्पताल की ओर से अपडेट मेडिकल बुलेटिन जारी किया गया है।
 
तमिल निर्देशक भारतीराजा की बिगड़ी तबीयत, फेफड़ों में गंभीर संक्रमण के चलते सीसीयू में भर्ती

मुंबई, 5 जनवरी (आईएएनएस)। तमिल सिनेमा के दिग्गज निर्देशक भारतीराजा की सेहत को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। उम्र के इस पड़ाव पर उनकी बिगड़ती तबीयत और बीते समय में झेले गए निजी दुखों ने उनके प्रशंसकों की बेचैनी और बढ़ा दी है। हाल के दिनों में उनकी सेहत को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिनके बीच अब अस्पताल की ओर से अपडेट मेडिकल बुलेटिन जारी किया गया है।

मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, भारतीराजा को फेफड़ों में गंभीर संक्रमण की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत को देखते हुए उन्हें क्रिटिकल केयर यूनिट में रखा गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है।

डॉक्टरों का कहना है कि शरीर के कुछ अंगों से जुड़ी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें सभी जरूरी उपचार दिए जा रहे हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें अभी भी क्रिटिकल केयर यूनिट में इलाज की जरूरत है।

84 वर्षीय भारतीराजा बीते कुछ समय से उम्र से जुड़ी समस्याओं से भी जूझ रहे थे। कुछ महीनों पहले वह अपनी बेटी के साथ विदेश में रह रहे थे। वापस चेन्नई लौटने के बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिवार ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। शुरुआत में सामान्य इलाज चल रहा था, लेकिन अचानक सांस की परेशानी बढ़ने पर उन्हें आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा।

पिछला साल भारतीराजा के लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन रहा। उनके इकलौते बेटे मनोज भारतीराजा का अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। बेटे की असमय मौत ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया। करीबी लोगों का कहना है कि वह इस गहरे सदमे से पूरी तरह उबर नहीं पाए थे और इसका असर उनकी मानसिक के साथ-साथ शारीरिक सेहत पर भी पड़ा।

भारतीराजा ने 1970 के दशक में तमिल सिनेमा में कदम रखा था और बहुत कम समय में अपनी अलग पहचान बना ली थी। उन्होंने शहरी कहानियों के प्रभुत्व वाले दौर में गांव, किसान और आम लोगों की भावनाओं को अपनी फिल्मों का केंद्र बनाया। उनकी फिल्मों ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि तमिल सिनेमा की सोच और भाषा को भी बदल दिया।

रजनीकांत, कमल हासन और श्रीदेवी जैसे बड़े कलाकारों के साथ उन्होंने कई यादगार फिल्में दीं। निर्देशन के साथ-साथ उन्होंने अभिनय में भी अपनी सादगी से दर्शकों को प्रभावित किया। सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया था।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम