'स्वाधीन समृद्धि ही वास्तविक वैभव है', प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया सुभाषित
नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से समृद्धि और वैभव का संदेश देते हुए शुक्रवार को सुभाषित शेयर किया गया। संस्कृत श्लोक के माध्यम से पीएम ने समाज में सत्पुरुषों की महत्ता और उनकी उपयोगिता का संदेश दिया है।
प्रधानमंत्री की ओर से संस्कृत श्लोक, "स्वाधीनैव समृद्धिर्जनोपजीव्यत्वमुच्छ्रयश्छाया। सत्पुंसो मरुभूरिव जीवनमात्रं समाशास्यम्॥" साझा किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि स्वाधीन समृद्धि ही वास्तविक वैभव है और दूसरों का आश्रय व आधार बनना ही सच्ची महानता है। जैसे मरुभूमि में छाया और जीवन दुर्लभ वरदान होते हैं, वैसे ही श्रेष्ठ पुरुष का जीवन परोपकार और लोक-कल्याण के लिए ही अभीष्ट होता है।
पीएम ने 'सुभाषितरत्नभाण्डागारम्' के 'सामान्यप्रकरणम्' के अंतर्गत 24वें अध्याय 'सज्जनप्रशंसा' का 133वां श्लोक साझा किया है। इस श्लोक में सत्पुरुष के जीवन और गुणों को 'मरुभूमि' (रेगिस्तान) के रूपक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इस रूपक के माध्यम से सत्पुरुष के स्वावलंबन और समाज के लिए उसकी उपयोगिता को रेखांकित किया गया है।
इस श्लोक में सत्पुरुष के गुणों को मरुभूमि के रूपक के माध्यम से समझाया गया है। इसमें स्वाधीन समृद्धि, दूसरों के लिए उपयोगी होना और ऊंचा उठकर दूसरों को छाया या आश्रय देने जैसे भाव व्यक्त किए गए हैं। इसके जरिए सत्पुरुष के जीवन की सार्थकता उसके स्वावलंबन और दूसरों के लिए उपयोगी होने में बताई गई है।
श्लोक के माध्यम से यह भाव व्यक्त किया गया है कि सज्जन व्यक्ति की समृद्धि स्वाधीन होती है और उसकी श्रेष्ठता दूसरों के लिए उपयोगी एवं सहायक बनने में है। मरुभूमि के रूपक के जरिए सत्पुरुष के जीवन की उपयोगिता को बताया गया है।
'सुभाषितरत्नभाण्डागारम्' संस्कृत साहित्य का विशाल संग्रह ग्रंथ है, जिसमें विभिन्न कालखंडों के चुने गए श्लोकों को एक साथ संकलित किया गया है। इस विशाल ग्रंथ का संकलन नारायण राम आचार्य (काव्यतीर्थ) द्वारा किया गया था।
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