स्वदेशी तकनीक और वायुसेना के साहस से सफल रहा ऑपरेशन सिंदूरः राजनाथ सिंह
हैदराबाद, 13 जून (आईएएनएस)। हैदराबाद में एयरफोर्स एकेडमी में संयुक्त ग्रेजुएशन परेड में भारतीय नौसेना के 9 अधिकारियों, भारतीय तट रक्षक के 3 अधिकारियों और सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम के 2 प्रशिक्षुओं को उड़ान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर 'विंग्स' से सम्मानित किया गया। नेविगेशन प्रशिक्षण पूरा करने पर तीन अधिकारियों को 'ब्रेवेट्स' दिए गए।
कैडेट्स को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज, भारतीय वायु सेना अकादमी की संयुक्त स्नातक परेड में आप सभी के बीच ज्ञान, मुझे गौरव की भावना हो रही है। सबसे पहले, मैं आप सभी को, प्रशिक्षण के लिए आपकी चुनौती पूरी करने पर बधाई देता हूं। आज जब आपके कैडेट जीवन की यात्रा समाप्त हो रही है, तो मुझे लगता है, आपको संतुष्टि और उत्साह का एक मिलाप-जुला भाव महसूस हो रहा है। लेकिन याद रखें, आपकी यात्रा अभी शुरू ही हुई है। आप एक ऐसी सर्विस का हिस्सा बन रहे हैं, जिसने देश की हर कॉल पर अपना बेहतर दिया है।
हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में भी, हमने यही भावना देखी है। हमारी एयर फोर्स ने स्पष्टता और शुद्धता के साथ, आतंकी ठिकानों को नेस्तानाबूत कर दिया। यदि हम उतना बड़ा ऑपरेशन सफलतापूर्वक अंजाम दे पाए तो उसके पीछे हमारे स्वदेशी तकनीक के साथ-साथ हमारी वायु सेना के प्रशिक्षित, साहसी और अनुशासित अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान था। निश्चित ही, भविष्य के ऑपरेशन्स में भी हमारी वायु सेना की यही भूमिका दिखेगी, ऐसा मेरा विश्वास है।
रक्षा मंत्री सिंह ने कैडेट्स से कहा, "मेरा विश्वास है कि आपके प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अभ्यासों में आपको अनिश्चितता और अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी तरह से तैयार किया गया है। एक पेशेवर सैनिक के रूप में यह आपका कर्तव्य है कि आप उभरती चुनौतियों के प्रति सदैव सजग रहें और आवश्यकता के अनुसार अपनी प्रतिक्रिया को पुनः अंशांकित करते रहें।"
राजनाथ सिंह ने कहा, "नई पीढ़ी के आप सभी योद्धाओं से मैं कहना चाहूंगा हूं कि आप आने वाले समय में युद्ध प्रणालियों और रणनीतियों को भी भली-भांति समझें। आपको इन्हें स्वीकार करना है, जरूरत पड़ने पर संशोधन भी करना है। आपको इनोवेशन करना है, एग्जीक्यूट करना है और इन सब में सफलता भी हासिल करना है। आपके लिए दुनिया में चल रहे हर युद्ध में एक नया शिक्षण विद्यालय होना चाहिए। आपको कड़ी मेहनत के साथ स्मार्ट काम और प्रतिभा की उतनी ही जरूरत होगी।"
रक्षा मंत्री कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा, "आपके कंधों पर सजे विंग्स, केवल एक बैज भर नहीं हैं, यह करोड़ों भारतीयों के भरोसे का प्रतीक हैं। इसलिए आपको अपनी पूरी सर्विस के दौरान प्रोफेसनिल्जम और आचरण के ऐसेउच्च मानक को लगातार बनाए रखना होगा, जो दूसरों के लिए प्रेरणा बनें। भारतीय एयर फोर्स लाखों-करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का बड़ा सोर्स है। अभी हाल ही में भारतीय वायु सेना के ही शुभांशु शुक्ला, भारत की ओर से स्पेश तक भी गए। अब उस परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी, आप सब की है।"
उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना ने केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक भी अपनी छाप छोड़ी है। भारतीय वायु सेना ने अनेक बचाव अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने में भी, महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।वायु सेना ने ने कई अवसरों पर विदेशी नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने में मदद की। इस प्रकार मानवीय मिशन के दौरान, भारतीय वायु सेना ने भारतीय संस्कृति और प्रकृतिके उस वास्तविक स्वरूप को प्रतिबिंबित किया है, जो राष्ट्रीयता भाषा या सीमाओं से ऊपर उठकर सम्पूर्ण मानवता की सहायता करने में विश्वास रखता है।
रक्षा मंत्री ने कहा, "मैं विशेष रूप से महिला पायलटों को बधाई देता हूं, जो आज भारतीय वायुसेना में कमीशन हो रही हैं। नारी शक्ति की बहुसंख्यक संख्या से, हमारी वायुसेना और भी स्ट्रैटजी, संतुलित और मजबूत हो रही है। यह हमारी समावेशी बल की ताकतों को परिभाषित करता है। हमारी वायु सेना और भी मानक, संतुलित और मजबूत हो रही है। यह हमारी समावेशी बल की ताकतों को दर्शाता है। मैं आप सभी प्रशिक्षुओं से कहूंगा, आप यहां से निकल स्काई को अपना घर बनाइये। कई बार यह कहा जाता है, कि 'आकाश ही सीमा है'। भारतीय वायु सेना के लिए तो यह सही है ही, लेकिन आपको आकाश की बात हमारे घर के विजन के साथ भी काम करना है और आगे की शुरुआत करनी है। आपका यही विजन, एक राष्ट्र के रूप में, 2047 तक हमें विकसित और निर्मित किया गया।"
--आईएएनएस
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