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स्वदेशी दिवाली मनाएं, मिट्टी के दीये और भारत में बने उत्पाद को अपनाएं: संदीप बंसल

लखनऊ, 6 नवंबर (आईएएनएस)। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल ने प्रदेश और देशवासियों से इस बार स्वदेशी दिवाली मनाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से दीपावली के अवसर पर मिट्टी की मूर्तियों, मिट्टी के दीयों और भारत में निर्मित लाइटों सहित स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया। इसके साथ ही, उन्होंने पूजित मूर्तियों और पूजा सामग्री के सम्मानजनक एकत्रीकरण एवं विसर्जन के लिए चलाए जा रहे 'मंगलमान अभियान' की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दीपावली का त्योहार पूरी श्रद्धा, शुद्धता और स्वच्छता के साथ मनाया जाना चाहिए तथा धार्मिक आस्था से जुड़ी मूर्तियों का सम्मान बनाए रखना भी सभी की जिम्मेदारी है।
 

लखनऊ, 6 नवंबर (आईएएनएस)। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल ने प्रदेश और देशवासियों से इस बार स्वदेशी दिवाली मनाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से दीपावली के अवसर पर मिट्टी की मूर्तियों, मिट्टी के दीयों और भारत में निर्मित लाइटों सहित स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया। इसके साथ ही, उन्होंने पूजित मूर्तियों और पूजा सामग्री के सम्मानजनक एकत्रीकरण एवं विसर्जन के लिए चलाए जा रहे 'मंगलमान अभियान' की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दीपावली का त्योहार पूरी श्रद्धा, शुद्धता और स्वच्छता के साथ मनाया जाना चाहिए तथा धार्मिक आस्था से जुड़ी मूर्तियों का सम्मान बनाए रखना भी सभी की जिम्मेदारी है।

संदीप बंसल ने बताया कि मंगलमान अभियान का उद्देश्य समाज में सकारात्मकता, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को बढ़ावा देना है। उन्होंने अभियान का संदेश देते हुए कहा, "हर दिन मंगल हो, हर मंगल बड़ा मंगल हो और बड़े मंगल से राष्ट्र मंगल हो।" उन्होंने बताया कि बड़े मंगल पर आयोजित होने वाले भंडारों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए भी यह अभियान काम कर रहा है। इसके तहत स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और भावयुक्त भंडारे आयोजित करने पर जोर दिया जा रहा है। अब इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मंगलमान अभियान ने 'स्वदेशी दीपावली' की पहल शुरू की है।

बंसल ने कहा कि घरों में पूरे साल पूजी जाने वाली देवी-देवताओं की मूर्तियों को त्योहार के बाद सम्मानपूर्वक एकत्रित करना और उनका उचित विसर्जन करना जरूरी है। अक्सर लोग पुरानी पूजित मूर्तियों को सड़क किनारे, कूड़े में या इधर-उधर फेंक देते हैं। इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने के साथ पर्यावरण भी प्रभावित होता है। इस समस्या के समाधान के लिए मंगलमान अभियान ने एक विशेष ऐप तैयार किया है, जिसका नाम मंगलमान डॉट इन है। इस ऐप के माध्यम से लखनऊ सहित देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले लोग अभियान से जुड़ सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने के बाद लोगों को अपने घर, मोहल्ले और आसपास के क्षेत्र में मूर्तियां एकत्रित करने वाले केंद्रों की जानकारी मिल सकेगी।

उन्होंने बताया कि लोग इन केंद्रों पर अपनी पूजित मूर्तियां जमा कर सकते हैं और आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर सकते हैं। एकत्रित मूर्तियों के सम्मानजनक विसर्जन की जिम्मेदारी मंगलमान अभियान उठाएगा। इसमें नगर निगम का भी सहयोग मिल रहा है। हालांकि, संदीप बंसल ने स्पष्ट किया कि नगर निगम का सहयोग उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी अभियान मूर्तियों के सम्मानजनक विसर्जन की व्यवस्था करेगा।

संदीप बंसल ने बताया कि इस अभियान के तहत लोग मूर्ति एकत्रीकरण केंद्रों को गोद भी ले सकते हैं। ये केंद्र केवल दीपावली के समय ही नहीं, बल्कि पूरे साल यानी 12 महीने काम करेंगे। यहां पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री और पूजित मूर्तियों को एकत्रित करने की व्यवस्था रहेगी। उन्होंने कहा कि लखनऊ इस पहल के जरिए पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि अधिक से अधिक लोग अभियान से जुड़ें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।

बंसल ने लोगों से अपील की कि पूजित मूर्तियों को नदियों में न डालें और न ही सड़कों पर फेंकें। इससे नदियों का प्रदूषण बढ़ता है और बाद में उनकी सफाई की जिम्मेदारी भी समाज पर आती है। उन्होंने कहा कि मूर्तियों को निर्धारित एकत्रीकरण केंद्रों तक पहुंचाना ही बेहतर विकल्प है।

स्वदेशी दीपावली का संदेश देते हुए संदीप बंसल ने मिट्टी की मूर्तियों और मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि घरों में सजावट के लिए लगाई जाने वाली लाइटें भी स्वदेशी होनी चाहिए। दीपावली भारत का सबसे बड़ा त्योहार है और इसे मनाते समय भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि त्योहार पर इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं ऐसी हों, जिनसे यह महसूस हो कि हम अपना भारतीय त्योहार मना रहे हैं। उन्होंने लखनऊवासियों सहित देश के लोगों से मंगलमान अभियान से जुड़ने, प्रदूषण रोकने और पूजित मूर्तियों का सम्मान बनाए रखने की अपील की।

--आईएएनएस

पीएसके