सुरेंद्रनाथ कॉलेज फंड गबन मामले में तृणमूल नेता को झटका, हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
कोलकाता, 8 अगस्त (आईएएनएस)। सुरेंद्रनाथ कॉलेज फंड गबन मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता और वरिष्ठ वकील देवाशीष बंद्योपाध्याय को बड़ा झटका लगा। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने मामले की सुनवाई के बाद उनकी याचिका को अस्वीकार कर दिया।
देवाशीष बंद्योपाध्याय के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उनके अग्रिम जमानत आवेदन का कड़ा विरोध किया गया।
राज्य के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यदि आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी जाती है तो इससे जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने दलील दी कि देवाशीष बंद्योपाध्याय इलाके में एक प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते हैं और उनकी रिहाई से मामले की निष्पक्ष जांच पर असर पड़ने की आशंका है।
राज्य पक्ष ने यह भी कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और इस चरण में आरोपी को अग्रिम जमानत देना जांच एजेंसियों के काम में बाधा उत्पन्न कर सकता है, इसलिए अदालत से उनकी याचिका खारिज करने का अनुरोध किया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने देवाशीष बंद्योपाध्याय की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
सुरेंद्रनाथ कॉलेज फंड गबन मामले को लेकर जांच एजेंसियां वित्तीय अनियमितताओं और धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों की जांच कर रही हैं। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले की जांच को और गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बता दें कि सुरेंद्रनाथ कॉलेज के यूनियन रूम से एक बंदूक और नकदी से भरे दो सूटकेस बरामद हुए थे। मामले की जांच कर रही पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के दो पदाधिकारियों के खिलाफ शस्त्र अधिनियम, आपराधिक अतिक्रमण, आपराधिक धमकी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने वाले अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
मुचीपारा पुलिस स्टेशन ने पूर्व शासी निकाय सदस्य देबाशीष बंद्योपाध्याय और विक्रेता परितोष दत्ता के खिलाफ कॉलेज परिसर के भीतर अवैध रूप से कमरों पर कब्जा करने के आरोप में एक आपराधिक मामला दर्ज किया है।
--आईएएनएस
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