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बजरंग दल अतिवादियों के सामने दृढ़ता के साथ खड़ा है : वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल

नई दिल्ली, 1 जनवरी (आईएएनएस)। देहरादून के जिम में अल्पसंख्यक समुदाय के ट्रेनर की छेड़छाड़ के आरोप में पिटाई करने का मामला तूल पकड़ा हुआ है। इस बीच कई मौलानाओं ने बजरंग दल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इस पर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने गुरुवार को अपनी प्रतिक्रिया दी।
 
बजरंग दल अतिवादियों के सामने दृढ़ता के साथ खड़ा है : वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल

नई दिल्ली, 1 जनवरी (आईएएनएस)। देहरादून के जिम में अल्पसंख्यक समुदाय के ट्रेनर की छेड़छाड़ के आरोप में पिटाई करने का मामला तूल पकड़ा हुआ है। इस बीच कई मौलानाओं ने बजरंग दल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इस पर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने गुरुवार को अपनी प्रतिक्रिया दी।

वीएचपी के प्रवक्ता विनोद बंसल ने बजरंग दल का बचाव करते हुए कहा, "एक बात बहुत महत्वपूर्ण है कि भारत हिंदू राष्ट्र था, हिंदू राष्ट्र है और हिंदू राष्ट्र रहेगा। इसके लिए किसी संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं है। यह संविधान भी तभी तक है, जब तक भारत में हिंदू हैं। मैं बता दूं कि बजरंग दल वह संस्था है, जिसका जन्म ही 1984 में सुरक्षा के लिए हुआ था, जब रथयात्रा निकल रही थी।"

उन्होंने कहा, "सुरक्षा, संस्कार और सेवा, ये तीन बजरंग दल के ध्येय वाक्य हैं। बजरंग दल ने अब तक करीब 80 लाख गोवंश को कसाइयों के जबड़े से बाहर निकाला है, साथ ही 50,000 से ज्यादा बहन-बेटियों को लव-जिहाद के चंगुल से मुक्ति दिलाई है। लाखों पौधरोपण करने के साथ-साथ लाखों यूनिट रक्तदान किया है।"

बंसल ने कहा, "वे अपनी जान हथेली पर लेकर गौ-माता और इस ध्येय भूमि की रक्षा करते हैं। जब 90 के दशक में बाबा अमरनाथ की यात्रा को खत्म करने के लिए जिहादियों ने चैलेंज दिया था कि जो भी यात्रा करे, वह अपनी जान को हथेली पर लेकर आए, ऐसे समय में उस चुनौती को स्वीकार करते हुए बजरंग दल ने यात्रा प्रारंभ की थी।"

वीएचपी प्रवक्ता ने कहा, "बजरंग दल जैसे संगठन के बारे में अगर कोई घृणित भाव रखता है और उसकी तुलना आतंकवादियों से करता है, तो मुझे उनकी बुद्धि पर तरस आता है। कांग्रेसी और जिहादी बजरंग दल के बारे में कुछ नहीं कहें, तो ज्यादा बढ़िया है। बजरंग दल अतिवादियों के सामने दृढ़ता के साथ खड़ा है। भारत हिंदू राष्ट्र है, इसमें किसी को दो राय नहीं होनी चाहिए।"

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम