सुप्रीम कोर्ट ने सीएक्यूएम की रिपोर्ट पर लिया संज्ञान, दीर्घकालिक उपायों को लागू कर चार सप्ताह में मांगा जवाब
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ओर से प्रस्तुत व्यापक रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर के लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण संकट से निपटने के लिए दीर्घकालिक उपायों की रूपरेखा दी गई थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल पंचोली की पीठ ने सीएक्यूएम की ओर से दायर एक व्यापक रिपोर्ट पर दलीलें सुनीं, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लगातार वायु प्रदूषण से निपटने के लिए संरचनात्मक और क्षेत्र-विशिष्ट हस्तक्षेपों की रूपरेखा दी गई है।
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अनुशंसित उपायों को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए और सभी संबंधित हितधारकों को चार सप्ताह के भीतर अपनी-अपनी कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
सीएक्यूएम की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि इस क्षेत्र में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण वाहन क्षेत्र है। आयोग ने अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने, पीयूसी 2.0 व्यवस्था को मजबूत करने, मेट्रो और रेल नेटवर्क का विस्तार करने, अतिरिक्त आरआरटीएस कॉरिडोर विकसित करने, इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों में संशोधन करने और पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए बेहतर प्रोत्साहन प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी स्टेकहोल्डर्स से कहा है कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के सुझाव पर अपना-अपना एक्शन प्लान तैयार करें और कोर्ट को सब्मिट करें, जिससे आगे इस पर विचार किया जा सके। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की सिफारिशों पर कोई आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीएक्यूएम की उन सिफारिशों पर भी ध्यान दिया, जिनका उद्देश्य दिल्ली में वाहनों की भीड़ कम करना था, जिनमें टोल प्लाजा और गुरुग्राम से आगे यातायात प्रबंधन से संबंधित सुझाव शामिल थे।
वहीं, दिल्ली नगर निगम और पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों जैसी एजेंसियों को अनुपालन का निर्देश देते हुए, न्यायालय ने दोहराया कि तत्काल क्रियान्वयन समय की आवश्यकता है, न कि आगे विचार-विमर्श। पीठ ने एमिकस को अतिरिक्त दीर्घकालिक उपायों का सुझाव देने की भी अनुमति दी, जिन्हें सीएक्यूएम आवश्यकता पड़ने पर एक पूरक रिपोर्ट के माध्यम से शामिल कर सकता है।
--आईएएनएस
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