सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के एसटीएफ थानों और विशेष अदालतों के अधिकार क्षेत्र पर कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक
नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के लिए बनाए गए तीन विशेष पुलिस थानों और उनसे जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित अदालतों के अधिकार क्षेत्र को रद्द कर दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे, ने पश्चिम बंगाल सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर नोटिस जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को तय की है। तब तक हाईकोर्ट के 19 जून के फैसले के अमल पर रोक रहेगी।
कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच ने 19 जून को पश्चिम बंगाल सरकार की 30 जनवरी, 31 जनवरी और 10 फरवरी 2025 की अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया था। यह याचिका जलपाईगुड़ी बार एसोसिएशन के सदस्यों ने दायर की थी।
30 जनवरी की अधिसूचना के तहत साल्ट लेक और न्यू जलपाईगुड़ी में एसटीएफ पुलिस थाने बनाए गए थे, जिन्हें दक्षिण और उत्तर बंगाल के बड़े क्षेत्रों में अधिकार क्षेत्र दिया गया था। इन थानों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), एनडीपीएस अधिनियम, आर्म्स एक्ट, यूएपीए, विस्फोटक अधिनियम, एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट और पीएमएलए जैसे मामलों की जांच का अधिकार दिया गया था।
इसके बाद 10 फरवरी की अधिसूचना के जरिए इन एसटीएफ थानों में दर्ज मामलों की सुनवाई का अधिकार बिधाननगर और सिलीगुड़ी की अदालतों को सौंपा गया था।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा था कि यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 197 में निर्धारित क्षेत्राधिकार संबंधी वैधानिक व्यवस्था के विपरीत है। अदालत ने यह भी कहा था कि कार्यपालिका केवल अधिसूचना जारी कर समानांतर न्यायिक व्यवस्था नहीं बना सकती, जबकि विभिन्न विशेष कानून पहले से विशेष अदालतों का प्रावधान करते हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी आशंका जताई थी कि इस व्यवस्था से "फोरम शॉपिंग" को बढ़ावा मिल सकता है और दूर-दराज के जिलों से शिकायतकर्ताओं व गवाहों को बिधाननगर या सिलीगुड़ी तक यात्रा करने में कठिनाई होगी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने एसटीएफ के गठन को रद्द नहीं किया था। वर्ष 2019 की अधिसूचना के तहत गठित एसटीएफ को जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी। उसका फैसला केवल 2025 की अधिसूचनाओं और उनसे जुड़े अदालतों के अधिकार क्षेत्र तक सीमित था।
सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के बाद फिलहाल हाईकोर्ट का 19 जून का फैसला स्थगित प्रभाव में रहेगा और मामले पर अंतिम फैसला शीर्ष अदालत में सुनवाई के बाद होगा।
--आईएएनएस
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