'सूखे अकाल के कारण चीख रहा किसान, सरकार सूखा मेवा खाकर ले रही डकार', शिवसेना-यूबीटी ने साधा निशाना
मुंबई, 21 सितंबर (आईएएनएस)। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी शिवसेना-यूबीटी ने किसानों के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोला है। शिवसेना-यूबीटी ने कहा कि किसान सूखे अकाल के कारण चीख-पुकार कर रहा है और सरकार सूखा मेवा खाकर डकार ले रही है।
शिवसेना-यूबीटी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में कहा गया है कि महाराष्ट्र की सरकार शाही ठाट-बाट से जी रही है, लेकिन आधी से ज्यादा जनता अकाल की छाया में है और महाराष्ट्र में डर, भूख, प्यास का शैतानी राज आने वाला है।
सवाल उठाया गया कि मानसून की वापसी का सफर शुरू हो चुका है और अकाल के गिद्ध पीछे छोड़ते हुए मानसून लौट रहा है। मराठवाड़ा, उत्तर महाराष्ट्र, विदर्भ का किसान बेहाल हो चुका है। इस अकाल को लेकर फडणवीस-मिंधे की सरकार गंभीर है क्या?
'सामना' में नांदेड़ की हालिया एक बैठक का जिक्र किया गया। इसमें कहा गया, "राज्य के कृषि मंत्री दत्तामामा भरणे सूखे अकाल का मुआयना करने के लिए मराठवाड़ा दौरे पर गए। नांदेड़ में अकालग्रस्त दौरा करने से पहले विश्राम गृह में हुई प्रशासनिक बैठक में मंत्री, विधायक, सांसद मंडली काजू-बादाम, सूखे मेवे पर हाथ साफ कर रही थी, ऐसी तस्वीरें प्रकाशित हुई हैं। किसान सूखे अकाल के कारण चीख-पुकार कर रहा है और सरकार सूखा मेवा खाकर डकार ले रही है। किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम है।"
संपादकीय में कहा गया, "सांसद बंडू जाधव ने अकाल में काजू-बादाम की इस खुराक का खुलेआम समर्थन किया। 50-50 करोड़ रुपए खाकर डकार लेने वालों की भूख मिटी नहीं है। और फिर अकाल की बैठक में भूख लगी इसलिए काजू-बादाम खाने हैं, यह कैसी रीति है?"
इसी बीच, 'सामना' में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी प्रश्न खड़े किए गए। संपादकीय में कहा गया, "मुख्यमंत्री इस पर कहते हैं, 'ऐसे काजू-बादाम खाना ठीक नहीं है। प्रशासन को संवेदनशील रहना चाहिए। हर चीज की राजनीति करने की विपक्ष को आदत है।' मुख्यमंत्री फडणवीस से ऐसी असंवेदनशीलता की उम्मीद नहीं थी। काजू-बादाम का ठीकरा उन्होंने प्रशासन पर फोड़ दिया।"
लेख में कहा गया, "राज्य में खड़ी फसलों का भारी नुकसान हुआ है। सोयाबीन जैसी फसलें जल गई हैं। किसान खेत की मेड़ पर बैठकर रो रहा है। मवेशियों का चारा, पीने का पानी, बच्चों की शिक्षा, बेटियों की शादियां, बुझते हुए चूल्हों की भयानक तस्वीर महाराष्ट्र देख रहा है। मगर मुख्यमंत्री कह रहे हैं , 'मंत्रिमंडल की बैठक में इस गंभीर स्थिति पर गहन चर्चा हुई है। सभी जिलों की प्राथमिक समीक्षा पूरी होगी। उसके बाद तुरंत फसलों के आधिकारिक पंचनामे करके किसानों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाएगी।' मुख्यमंत्री की बातों पर भरोसा कैसे करें?"
शिवसेना-यूबीटी के मुखपत्र में कहा गया कि मुख्यमंत्री सिर्फ बोलते हैं। करते कुछ नहीं। इसमें लिखा है, "प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर तेल जलाकर हजारों दिए जलाए गए, लेकिन अकाल का साया क्या उससे दूर हो जाएगा? अकाल गंभीर है, लेकिन सूखे मेवे की बहार बहुत ही शर्मनाक है।"
शिवसेना-यूबीटी ने मांग की कि सूखे अकाल के मुद्दे पर सरकार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा करानी चाहिए। राजनीति को किनारे रखकर अकाल राहत के लिए सर्वदलीय 'टास्क फोर्स' का गठन करना चाहिए। शरद पवार के कहे अनुसार, बिना किसी औपचारिक मानदंड का इंतजार किए राज्य में अकाल घोषित करना चाहिए। किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 हजार की मदद, पूरी तरह से एकमुश्त कर्जमाफी, विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस माफी और चारा छावनियां शुरू करके किसानों पर आया संकट हल्का करना चाहिए।
--आईएएनएस
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