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स्तनपान के दौरान दर्द, सूजन या संक्रमण? सही देखभाल से मिल सकती है राहत

नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। बच्चे के जन्म के बाद मां के शरीर में कई बदलाव होते हैं और इसी दौरान स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। दूध ठीक से बाहर न निकल पाने की वजह से स्तनों में भारीपन, दर्द और सूजन हो जाती है, जिसे ब्रेस्ट इंगोर्जमेंट कहा जाता है।
 
स्तनपान के दौरान दर्द, सूजन या संक्रमण? सही देखभाल से मिल सकती है राहत

नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। बच्चे के जन्म के बाद मां के शरीर में कई बदलाव होते हैं और इसी दौरान स्तनों में दूध बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। दूध ठीक से बाहर न निकल पाने की वजह से स्तनों में भारीपन, दर्द और सूजन हो जाती है, जिसे ब्रेस्ट इंगोर्जमेंट कहा जाता है।

इस स्थिति में स्तन सख्त, भारी और संवेदनशील हो जाते हैं। कभी-कभी इतना दर्द होता है कि मां के लिए बच्चे को दूध पिलाना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि स्तनपान रोक देना चाहिए। उल्टा, बार-बार और सही तरीके से स्तनपान कराना इस समस्या को कम करने में मदद करता है।

अगर बच्चा सही तरीके से दूध नहीं पी पा रहा है, तो हल्के हाथ से दूध निकालना भी जरूरी होता है, ताकि स्तनों में दबाव कम हो सके। धीरे-धीरे मालिश करने से भी आराम मिलता है। इसके साथ ही स्तनों की सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। हर फीडिंग से पहले और बाद में साफ-सफाई रखने से संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

कई बार अगर ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या बढ़कर मैस्टाइटिस में बदल सकती है। इसमें स्तनों की त्वचा लाल हो जाती है, तेज दर्द होता है और बुखार भी आ सकता है। यह स्थिति गंभीर हो सकती है और इसमें डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है। कुछ मामलों में ब्रेस्ट में पस या खून जैसा डिस्चार्ज भी हो सकता है, जिसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा, फटे हुए निप्पल भी एक आम समस्या है, जो गलत तरीके से फीडिंग कराने या सूखापन की वजह से हो सकते हैं। ऐसे में प्राकृतिक तेल या डॉक्टर द्वारा सुझाई गई क्रीम का इस्तेमाल राहत दे सकता है।

इसके अलावा, हमेशा कॉटन के ढीले कपड़े पहनना, स्तनों को साफ और सूखा रखना और किसी भी तरह के सिंथेटिक कपड़े से बचना भी जरूरी है।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम