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स्पाइन को रखना है सीधा तो करें ताड़ासन, पोस्चर सुधारने के साथ बढ़ता है आत्मविश्वास

नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय योग संस्कृति में ताड़ासन को सभी आसनों का आधार माना जाता है। इस आसन में शरीर को ताड़ के वृक्ष की तरह सीधा और संतुलित रखा जाता है। नियमित अभ्यास से शरीर में स्फूर्ति आती है और सही ढंग से खड़े होने की आदत विकसित होती है।
 

नई दिल्ली, 26 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय योग संस्कृति में ताड़ासन को सभी आसनों का आधार माना जाता है। इस आसन में शरीर को ताड़ के वृक्ष की तरह सीधा और संतुलित रखा जाता है। नियमित अभ्यास से शरीर में स्फूर्ति आती है और सही ढंग से खड़े होने की आदत विकसित होती है।

ताड़ासन का अर्थ पेड़ से है और आसन का अर्थ योग से होता है। यानी कि शरीर को ताड़ के पेड़ की तरह लम्बा बनाने में मदद करता है। वैसे संस्कृत में ताड़ को पर्वत का पर्यायवाची भी कहा जाता है,जो लम्बाई का प्रतिक होता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को लेकर अपनी राय दी है। उनका कहना है कि ताड़ासन को नियमित रूप से अपने जीवनशैली में अपनाना चाहिए। उनके अनुसार, ताड़ासन एक आसान योगासन है जिसे खड़े होकर किया जाता है। इसे करने से शरीर में स्थिरता आती है और बैलेंस बेहतर होता है।

योग एक्सपर्ट का मानना है कि ताड़ासन के नियमित अभ्यास से शरीर के पोस्चर में सुधार, स्थिरता बनाना और स्पाइनल अलाइनमेंट को सपोर्ट करना एक आसान स्टैंडिंग पोज से शुरू किया जा सकता है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत और सीधा रखता है, कंधों और गर्दन की जकड़न कम करता है, शरीर के संतुलन और स्थिरता को बढ़ाता है। आत्मविश्वास बढ़ाता है और मन को एकाग्र करता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार करता है।

ताड़ासन को रोजाना आसानी से किया जा सकता है, जिसके लिए साधक सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। इसके बाद दोनों पैरों को जोड़कर रखें और वजन समान रूप से दोनों पैरों पर बांटें। फिर घुटनों को सीधा रखते हुए जांघों को थोड़ा अंदर की ओर खींचते हुए पेट को हल्का अंदर की ओर रखें और छाती को आगे की ओर करें और कंधों को पीछे व नीचे की ओर रखें ताकि रीढ़ सीधी रहे। इस दौरान गर्दन सीधी रखें और आंखों को आगे किसी बिंदु पर केंद्रित करें व हाथों को शरीर के दोनों ओर सीधा रखें या फिर दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़कर नमस्कार मुद्रा में छाती के सामने रखें। अभ्यास के दौरान गहरी सांस लेते और छोड़ते रहें। इस मुद्रा में 30 से 60 सेकंड तक रहें।

लो बीपी या चक्कर आने की समस्या वाले लोगों को पंजों पर संतुलन बनाते समय सतर्क रहना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को यह आसन किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में करना चाहिए।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम