सपा सांसद राजीव राय का केंद्र पर हमला, बोले- 'सरकार की बातों और हकीकत में बड़ा फर्क'
नई दिल्ली/लखनऊ, 13 जून (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने सिंधु नदी के पानी और ओमान में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हमलों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इस सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।
सिंधु नदी के पानी को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर सपा सांसद ने कहा, "इस सरकार पर क्या भरोसा किया जा सकता है? वे अलग-अलग तरीके की बातें करते हैं। वे विपक्ष के सांसदों से कुछ कहते हैं, मीडिया में कुछ और कहते हैं, जबकि कागजों व हकीकत में चीजें कुछ और होती हैं। यह ऐसी सरकार है, जो देशवासियों से कुछ और कहती है, विदेशों में कुछ और करती है।"
भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर अमेरिकी हमलों को लेकर भी सपा सांसद ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "क्या प्रधानमंत्री ने अपने दोस्त ट्रंप के खिलाफ एक भी बयान दिया है? डोनाल्ड ट्रंप अक्सर धमकाते रहते हैं। भाजपा के लोगों को समझ लेना चाहिए कि प्रधानमंत्री सिर्फ उनके नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के हैं। भले ट्रंप दोस्त है, लेकिन वह हर रोज अपमान करता है। इस पर भाजपा के लोग खामोश रहते हैं। इसलिए ये लोग पूरे देश का अपमान कर रहे हैं।"
सपा सांसद ने यह भी कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री का कोई अपमान करे, ये हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है, भले यह भाजपा समर्थकों को बर्दाश्त हो। राजीव राय ने कहा, "मेरा इतना कहना है कि विश्व गुरु क्यों नहीं बोलते हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' से पहले पीएम मोदी हर मुद्दे पर क्यों बोला करते थे और अभी खामोश क्यों हैं।"
टीएमसी से 20 सांसदों की बगावत पर सपा सांसद ने कहा, "ऐसे सांसद मीडिया के घरों में आकर ही बैठते होंगे। कई दिन से बोल रहे थे और शुक्रवार को एक लिस्ट जारी हुई। इसमें सीरियल नंबर गायब थे, नाम कटे हुए थे। यह ठीक वैसी स्थिति है, जब डरा-धमकाकर एक लक्ष्य बता दिया जाता है, जैसे ओपिनियन पोल में बताया जाता है कि कितनी सीटें मिलने वाली हैं और उसके बाद वोटों को लूट लिया जाता है और मशीनों को जला दिया जाता है।"
वहीं, टीएमसी के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा, "दो चीजें इससे समझ में आती हैं। पहली यह कि जितने भी बागी सांसद टीएमसी के हैं ये भारतीय जनता पार्टी में अपने आपको विलय नहीं कर रहे हैं और ये बड़ी चीज है। इसका मतलब अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं करना चाह रहे हैं। दूसरी चीज है वो अपने आपको एक अलग फ्रैक्शन करते हैं तो इसमें संवैधानिक चीजें भी देखी जाएंगी।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारा एक सीधा सा सवाल है कि अगर आपको तृणमूल कांग्रेस से ममता बनर्जी से या अभिषेक बनर्जी से इतनी परेशानी थी तो उसके लिए आपने 4 मई के पहले का समय क्यों नहीं चुना? क्यों ऐसा होता है कि जब तक आप सत्ता में थे तब सत्ता की सारी मलाई खा रहे थे, सारी सिक्योरिटी ले रहे थे, आप नामित सांसद थे और तृणमूल का बिल्ला लगाकर आप घूम रहे थे। लेकिन तृणमूल को हारते ही आपने उसको पत्ते की तरह गिरा दिया।"
--आईएएनएस
डीसीएच/
