सपा नेता पवन पांडेय का भाजपा पर हमला, बोले-पोस्टरबाजी से नहीं दबेगा राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला
अयोध्या, 14 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर है। इस बीच अयोध्या, मथुरा और बाराबंकी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए गए हैं। इसको लेकर सपा नेता पवन पांडेय ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इसके जरिए असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
आईएएनएस से बातचीत में पवन पांडेय ने कहा कि यही भारतीय जनता पार्टी का वास्तविक चरित्र है। उनका आरोप है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले ने भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की छवि को नुकसान पहुंचाया है। इस विवाद के बाद भाजपा जनता के बीच जवाब देने की स्थिति में नहीं है और इसलिए समाजवादी पार्टी के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
पांडेय ने कहा कि अखिलेश यादव और अन्य नेताओं के खिलाफ पोस्टर लगाकर भाजपा जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाना चाहती है। उन्होंने कहा कि पोस्टर लगाने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। जनता के बीच चढ़ावा चोरी का मुद्दा पहुंच चुका है और लोग इस पर सवाल पूछ रहे हैं।
पोस्टर लगाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और कानूनी कार्रवाई करेगी।
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रस्तावित दौरे पर पवन पांडेय ने कहा कि शंकराचार्य गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने, गौ संरक्षण और गौ सम्मान के मुद्दे को लेकर विभिन्न स्थानों का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी भी गौ संरक्षण और गौ सम्मान के पक्ष में है।
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी एक ओर गाय के नाम पर राजनीति करती है, जबकि दूसरी ओर ऐसे लोगों से चंदा लेने के आरोप लगते रहे हैं जो पशु वध के कारोबार से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के कथनी और करनी में अंतर है और जनता इस बात को समझ चुकी है।
राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक को लेकर पूछे गए सवाल पर पवन पांडेय ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि कथित दान चोरी मामले में जिन लोगों की भूमिका रही है, उनके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कथित अनियमितताओं को संरक्षण दिया, उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि राम मंदिर का निर्माण करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है, तो मंदिर में चढ़ाए गए दान और श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ हुआ है तो इसकी पूरी जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पांडेय ने यह भी मांग की कि राम मंदिर ट्रस्ट में देश के प्रमुख शंकराचार्यों, अयोध्या के संत-महंतों और भगवान श्रीराम से जुड़े पारंपरिक धार्मिक प्रतिनिधियों को भी उचित स्थान दिया जाए। उनका कहना है कि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए प्रत्येक दान का स्पष्ट हिसाब रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि चाहे कोई श्रद्धालु एक रुपये का दान करे या करोड़ों रुपये का, प्रत्येक राशि का पारदर्शी रिकॉर्ड होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन की व्यवस्था मिले और दान व्यवस्था में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए।
राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पर भी पवन पांडेय ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अयोध्या के अधिकांश लोग एसआईटी की जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उनके अनुसार, केवल भाजपा के नेता ही इस जांच पर भरोसा जता रहे हैं।
उन्होंने ट्रस्ट और सरकार के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच तभी संभव है जब इसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय करे। पांडेय ने कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच होती है तो सच्चाई सामने आएगी और लोगों का विश्वास भी कायम रहेगा।
--आईएएनएस
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