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साउथ मेकर्स ने फिर किया कमाल, 'नागबंधम' एक भव्य, रहस्यमयी और शानदार विजुअल मिथोलॉजिकल एडवेंचर

रेटिंग: चार स्टार (4/5) साउथ फिल्म इंडस्ट्री ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय पौराणिक कथाओं और संस्कृति को बड़े पर्दे पर भव्यता के साथ पेश करने में उसका कोई मुकाबला नहीं है। ऐसे समय में जब दर्शक भारतीय मिथकों पर आधारित बड़े विजुअल स्पेक्टेकल की तलाश में हैं, 'नागबंधम' एक महत्वाकांक्षी फिल्म के रूप में सामने आती है, जो रहस्य, पौराणिक कथाओं, फैंटेसी और एडवेंचर का शानदार संगम पेश करती है।
 

रेटिंग: चार स्टार (4/5) साउथ फिल्म इंडस्ट्री ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारतीय पौराणिक कथाओं और संस्कृति को बड़े पर्दे पर भव्यता के साथ पेश करने में उसका कोई मुकाबला नहीं है। ऐसे समय में जब दर्शक भारतीय मिथकों पर आधारित बड़े विजुअल स्पेक्टेकल की तलाश में हैं, 'नागबंधम' एक महत्वाकांक्षी फिल्म के रूप में सामने आती है, जो रहस्य, पौराणिक कथाओं, फैंटेसी और एडवेंचर का शानदार संगम पेश करती है।

सबसे पहले श्रेय जाता है फिल्म के निर्माताओं निशिता नागिरेड्डी और किशोर अन्नापुरेड्डी को, जिन्होंने निक स्टूडियोज और अभिषेक पिक्चर्स के बैनर तले इस फिल्म को वह विशाल कैनवास, बजट और तकनीकी गुणवत्ता प्रदान की है, जिसकी इस तरह की कहानी को आवश्यकता थी। फिल्म का बजट, उसका स्केल और विजन कई बड़ी फिल्मों के बराबर नजर आता है। बेहद भव्य स्तर पर बनाई गई यह फिल्म शुरुआत से ही दर्शकों को अपनी दुनिया में खींच लेती है। पहले ही फ्रेम से इसका ड्रामा, रहस्य और प्रस्तुति प्रभावित करती है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, फिल्म अपने विजुअल एम्बिशन, दमदार किरदारों की एंट्री, शानदार वर्ल्ड-बिल्डिंग और ईमानदार कहानी कहने के अंदाज से लगातार प्रभावित करती रहती है। यह साल की सबसे महत्वाकांक्षी पैन-इंडिया फिल्मों में से एक बनकर उभरती है। खास बात यह है कि फिल्म बिना समय गंवाए सीधे अपने मूल विषय पर केंद्रित रहती है।

फिल्म एक ऐसे रहस्यमयी संसार का द्वार खोलती है, जहां प्राचीन रहस्य, दैवीय किंवदंतियां और छिपे हुए खजाने पूरी कहानी को दिशा देते हैं। फिल्म अपनी पौराणिक दुनिया को जल्दबाजी में नहीं दिखाती, बल्कि धीरे-धीरे 'नागबंधम' और उससे जुड़े रहस्यों का विस्तार करती है। यही संतुलित प्रस्तुति दर्शकों की जिज्ञासा बनाए रखती है और फिल्म के समृद्ध सिनेमाई ब्रह्मांड को लगातार विस्तारित करती रहती है।

फिल्म की शुरुआत मुख्य खलनायक के रूप में ऋषभ साहनी की प्रभावशाली एंट्री से होती है। इसके बाद कहानी जिस तरह आगे बढ़ती है, वह शुरू से अंत तक दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखती है।

निर्देशक अभिषेक नामा विशेष प्रशंसा के पात्र हैं, क्योंकि उन्होंने ऐसे जॉनर में फिल्म बनाने का साहस दिखाया है, जिसके लिए मजबूत कल्पनाशक्ति और पूरे विश्वास की आवश्यकता होती है। उनका विजन पूरी फिल्म में एकसमान बना रहता है। उन्होंने पौराणिक कथाओं और फैंटेसी के बीच संतुलन बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित किया है कि भव्य विजुअल्स के बीच फिल्म की भावनात्मक आत्मा कहीं खो न जाए। स्क्रीनप्ले एक रोमांचक एडवेंचर की तरह आगे बढ़ता है, जहां समय-समय पर नए रहस्य सामने आते हैं और अंत तक उत्सुकता बनी रहती है।

'नागबंधम' की सबसे बड़ी ताकत इसके विजुअल्स हैं। फिल्म का हर फ्रेम बारीक मेहनत और शानदार क्राफ्ट्समैनशिप का उदाहरण है। भव्य मंदिरों की वास्तुकला, प्राचीन साम्राज्य, रहस्यमयी स्थान और विशाल एक्शन सीक्वेंस फिल्म को बेहद आकर्षक बनाते हैं। प्रोडक्शन वैल्यू बेहतरीन है, जबकि वीएफएक्स कहानी को सपोर्ट करते हैं और कभी भी उस पर हावी नहीं होते। पूरी फिल्म बड़े पर्दे के लिए ही बनाई गई महसूस होती है।

मुख्य नायक की भूमिका निभा रहे विराट कर्णा आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन करते हैं और पूरी कहानी को ईमानदारी और तीव्रता के साथ आगे बढ़ाते हैं। नभा नटेश अपने किरदार में सौम्यता और भावनात्मक गहराई लेकर आती हैं। वहीं मुख्य प्रतिपक्षी के रूप में ऋषभ साहनी अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से गहरी छाप छोड़ते हैं। महेश मांजरेकर संत की महत्वपूर्ण भूमिका में बेहद प्रभावशाली नजर आते हैं और जब भी स्क्रीन पर आते हैं, अपने अभिनय से दृश्य को मजबूती प्रदान करते हैं। दक्षा नागरकर और अन्य सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं, जिससे फिल्म की विशाल दुनिया विश्वसनीय महसूस होती है।

फिल्म की एक्शन कोरियोग्राफी विशेष रूप से इंटरवल ब्लॉक और क्लाइमेक्स में देखने लायक है। केवल बड़े विजुअल्स पर निर्भर रहने के बजाय इन एक्शन सीक्वेंस को पौराणिक कथा के साथ जोड़ा गया है, जिससे हर टकराव का अपना महत्व महसूस होता है। सर्पों, प्राचीन अनुष्ठानों और विशाल युद्धों से जुड़े कई दृश्य रोमांच पैदा करते हैं और फिल्म निर्माताओं की महत्वाकांक्षा को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

तकनीकी दृष्टि से भी 'नागबंधम' हर विभाग में मजबूत फिल्म साबित होती है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की भव्यता और रहस्यमयी वातावरण को खूबसूरती से कैमरे में कैद करती है। बैकग्राउंड स्कोर रोमांच और भावनात्मक दृश्यों को और प्रभावशाली बनाता है। एडिटिंग फिल्म के बड़े कैनवास के बावजूद कहानी को रोचक बनाए रखती है, जबकि साउंड डिजाइन थिएटर में फिल्म देखने के अनुभव को और बेहतर बनाता है।

फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि यह भारतीय पौराणिक परंपराओं का सम्मान करते हुए उन्हें मनोरंजक फैंटेसी-एडवेंचर शैली में प्रस्तुत करती है। यह केवल पुरानी कथाओं को दोहराती नहीं है, बल्कि उनसे प्रेरित होकर अपना अलग और सिनेमाई मिथकीय संसार तैयार करती है, जो नया भी लगता है और प्रभावशाली भी।

यदि किसी एक पहलू को हल्की कमजोरी कहा जाए, तो वह फिल्म के कुछ हिस्से हैं जहां पौराणिक पृष्ठभूमि को विस्तार से समझाया गया है। इन दृश्यों में गति थोड़ी धीमी महसूस हो सकती है। हालांकि इसके बाद कहानी तेजी से रफ्तार पकड़ लेती है और दमदार ट्विस्ट, शानदार विजुअल्स तथा भावनात्मक रूप से संतोषजनक घटनाक्रम के साथ फिर से दर्शकों को बांध लेती है।

'नागबंधम' के जरिए साउथ फिल्म इंडस्ट्री एक बार फिर यह साबित करती है कि महत्वाकांक्षी पैन-इंडिया सिनेमाई अनुभव तैयार करने में वह लगातार अग्रणी बनी हुई है। यह फिल्म पौराणिक कथाओं, फैंटेसी, एडवेंचर और भावनाओं का ऐसा संतुलित मिश्रण प्रस्तुत करती है, जो खास तौर पर बड़े पर्दे पर देखने के लिए बनाया गया है।

जो दर्शक रहस्य, प्राचीन किंवदंतियों, भव्य एक्शन, शानदार वर्ल्ड-बिल्डिंग और विजुअल स्पेक्टेकल से भरपूर एक बड़े सिनेमाई अनुभव की तलाश में हैं, उनके लिए 'नागबंधम' निश्चित रूप से एक संतोषजनक और यादगार फिल्म साबित होगी।

--आईएएनएस

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