सोमनाथ मंदिर की स्थापना सतयुग में चंद्र देवता ने की थी : स्वामी स्वप्रकाश
नोएडा, 11 जनवरी (आईएएनएस)। वैदिक धर्म संस्थान के ट्रस्टी और आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन से जुड़े स्वामी स्वप्रकाश ने कहा कि सोमनाथ मंदिर की स्थापना सतयुग में चंद्र देवता ने की थी। उन्होंने आईएएनएस से खास बातचीत के दौरान देश और विदेश के कई ज्वलंत मुद्दों पर बड़ी बेबाकी से जवाब दिया। यहां पढ़िए बातचीत के मुख्य अंश।
सवाल : सोमनाथ जी का इतिहास क्या है?
जवाब : सोमनाथ जी की स्थापना सतयुग में चंद्र देवता ने की थी। चंद्र देव को अपनी खूबसूरती पर थोड़ा गर्व हो गया था। ऐसा कहते हैं कि राजा दक्ष ने उनको श्राप दिया था कि आपकी खूबसूरती लुप्त हो जाएगी। जब उन्हें पश्चाताप हुआ और उन्होंने इससे मुक्ति के उपाय की बात की तो राजा दक्ष ने कहा कि सौराष्ट्र में जाकर शिवजी की तपस्या करो। उन्होंने सबसे पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ जी को स्थापित किया। वो ज्योतिर्लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंग में सबसे प्रथम माना जाता है। जितने भी विष्णु अवतार हैं, परशुराम, श्रीकृष्ण और श्रीराम, सबने सोमनाथ की साधना की है।
सवाल : हाल ही में आपने कहा था कि एक शिवलिंग तोड़ेंगे तो हजार निकलेंगे। इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
जवाब : सनातन धर्म को कोई नष्ट नहीं कर सकता, क्योंकि इस धर्म से सारे धर्मों की उत्पत्ति हुई है। सनातन धर्म को कोई नष्ट करने की कोशिश करेगा तो उसे लगेगा कि उसने कुछ किया है, पर कुछ समय बाद वो (शिवलिंग) और बड़े होकर आएंगे। जब महमूद गजनवी ने सोमनाथ जी को खंडित किया तो ज्योतिर्लिंग के मूल अवशेष कुछ अग्निहोत्री ने इकठ्ठा किए। शंकराचार्य जी ने उनको बोला था कि एक हजार साल तक उसकी साधना करनी है और उनको गुप्त रखना है। क्योंकि विदेशी ताकत 1,000 साल तक भारत पर शासन करेगी। ऐसा ही हुआ, आप देखिए मुगल और ब्रिटिशर्स आए। उनको बताया गया कि राम मंदिर की स्थापना भी होगी। तो 900 साल बाद जब वापस विजयानंद सरस्वती जी शंकराचार्य जी के पास आए, उनसे कहा गया 100 साल और बाकी हैं, तो उन्होंने कहा था 100 साल बाद राम मंदिर की स्थापना हो जाएगी और भारत आजाद हो जाएगा। तब एक गुरु जिसके नाम पर शिव और सूर्य हैं, उनको यह नाम देना। सोचिए मतलब 100 साल पहले और उसी के ठीक 15 जनवरी 2025 में संक्रांति के दिन गुरुदेव को 11 मूल ज्योतिर्लिंग के अवशेष समर्पित किए गए।
सवाल : सोमनाथ का मूल शिवलिंग श्रीश्री गुरु जी को सौंप दिया गया था। अब आगे का कार्यक्रम क्या है?
जवाब : वह गुरुदेव अच्छा बता सकेंगे। हमारा बस यही है कि सोमनाथ जी की जो ऊर्जा है, वह गांव-गांव तक देश के कोने-कोने तक पहुंचे। यह समय ऐसा है, भक्ति की लहर जगानी है और हो सकता है सोमनाथ जी इसीलिए आए हैं, ताकि लोगों को अपनी संस्कृति, अपनी पहचान और अपने सनातन धर्म पर विश्वास और गर्व रहे।
सवाल : क्या इस मूल शिवलिंग की सोमनाथ मंदिर में भी स्थापना की जाएगी?
जवाब : जैसा गुरुदेव चाहेंगे। पीएम मोदी चाहेंगे। जैसा गुरुदेव की आज्ञा होगी। अभी तो सोमनाथ कॉरिडोर बन रहा है। पूरा कायाकल्प हो रहा है।
सवाल : सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के मौके पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को जाने से मना किया था। क्या यह सही था?
जवाब : यह सही है फिर राजेंद्र प्रसाद खुद के पैसे से टिकट करके गए, सरकार के कोटे से नहीं गए, यह सही बात है।
सवाल : प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह से सोमनाथ मंदिर का कायाकल्प किया है, क्या कहेंगे?
जवाब : भारत का सौभाग्य है कि हमारे पास ऐसे प्रधानमंत्री हैं, इस समय जब स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर, यहां तक कि घरेलू स्तर पर इतनी नाजुक है। जो हमारा डेमोग्राफिक चेंज हो रहा है तो इस समय ऐसे प्रधानमंत्री का आना, जो सनातन धर्म की रक्षा कर सके और हमारे धार्मिक स्थल को पुनर्जीवित कर सके। ऐसे प्रधानमंत्री का होना बहुत गर्व की बात है।
सवाल : देश में जिस तरह का सामाजिक विद्वेष फैल रहा है, उसे रोकने में आर्ट ऑफ लिविंग किस तरह से महत्वपूर्ण हो सकता है?
जवाब : देखिए, अगर कभी कोई शरीर का अंग खराब हो जाता है तो चीर-फाड़ करके उसका ऑपरेशन कर ठीक कर सकते हैं। पर जब रक्त खराब हो जाए तो पूरी रक्त की शुद्धि करनी पड़ती है। रक्त की शुद्धि सिर्फ भक्ति, ज्ञान और ध्यान से ही संभव है। भारतवर्ष ही नहीं, पूरे विश्व में रक्त की शुद्धि करनी पड़ेगी। हिंसा को लोग गर्व के तौर पर लेने लगे हैं। कोर वैल्यूज से दूर हटकर अपनी नेगेटिविटी में लोग गर्व करने लगे हैं। इसीलिए आर्ट ऑफ लिविंग जैसी संस्था जो 186 देश में व्याप्त है, मेडिटेशन सिखा रही है।
सवाल : आप आर्ट ऑफ लिविंग का इंटरनेशनल चैप्टर भी देखते हैं, भारत की विदेश नीति के बारे में आपके क्या विचार हैं?
जवाब : भारत की विदेश नीति बहुत संतुलित है। विदेश मंत्री एस जयशंकर एक संतुलित डिप्लोमैट का बेहतरीन उदाहरण हैं।
सवाल : क्या श्रीश्री रविशंकर भी रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रोकने में मध्यस्थता कर सकते हैं?
जवाब : बिल्कुल कर सकते हैं क्योंकि आर्ट ऑफ लिविंग ही एक भारतीय संस्था है, जिसकी उपस्थिति रूस और यूक्रेन में बहुत मजबूत है। हमारे रूस, यूक्रेन और पोलैंड में आश्रम हैं और बहुत सारे टीचर्स हैं। रूस में तो कम से कम हमारे 700 से ज्यादा आर्ट ऑफ लिविंग के टीचर्स हैं। यूक्रेन में हमारे कम से कम 400 से ज्यादा टीचर हैं तो जब यहां के लोग अगर एक साथ मिलेंगे तो समझौता हो सकता है। भारत के जब स्टूडेंट्स फंस गए थे, यूक्रेन से जब आए थे तो सारे छात्र हमारे पोलैंड आश्रम में ही रहे थे और हमने उनके रहने और खाने की व्यवस्था की थी।
सवाल : क्या वह अमेरिका को वेनेजुएला पर हमले जैसे मामलों में भी गाइडेंस दे सकते हैं?
जवाब : आधिकारिक तौर पर सरकार की तरफ से अगर गुरुदेव से अनुरोध किया जाए तो 100 प्रतिशत इसका समाधान निकल सकता है। देखिए, किसी भी समस्या का समाधान किसी भी पक्ष में रहकर नहीं आता है, वह मिडिल में आता है। बीच में रहकर आता है। गुरुदेव मध्यस्थता करने के लिए एक परफेक्ट बैलेंस लीडर हैं, जो दोनों पक्षों को समान रूप से देखते हैं।
सवाल : जिस तरह से अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया है, क्या दुनिया विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है?
जवाब : मैं चाहूंगा कि विश्व युद्ध की तरफ नहीं बढ़ें। हम अपनी एनर्जी ऐसी नेगेटिव चीज में क्यों लगाएं? भारत का पक्ष शांति की ओर होगा।
--आईएएनएस
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