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सीताराम दास महाराज ने योगी सरकार और एसआईटी पर जताया भरोसा, बोले-अब तक की कार्रवाई निष्पक्ष

अयोध्या, 13 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर चल रही सुनवाई को लेकर सीताराम दास महाराज ने कहा कि हम लोग न्यायप्रिय लोग हैं और न्यायपालिका पर हमारा पूरा विश्वास और भरोसा है। न्यायालय के द्वारा जो भी फैसला आएगा, उसे हम स्वीकार करेंगे।
 

अयोध्या, 13 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर चल रही सुनवाई को लेकर सीताराम दास महाराज ने कहा कि हम लोग न्यायप्रिय लोग हैं और न्यायपालिका पर हमारा पूरा विश्वास और भरोसा है। न्यायालय के द्वारा जो भी फैसला आएगा, उसे हम स्वीकार करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया और एसआईटी ने पारदर्शिता के साथ त्वरित कार्रवाई करते हुए अपनी जांच प्रक्रिया शुरू की है। जांच के आधार पर जो भी आरोपी पाए गए, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है और आगे भी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज और साधु-संतों का विश्वास योगी सरकार और एसआईटी जांच पर है। उन्होंने कहा, "अभी तक जो भी कार्रवाई हुई है, वह निष्पक्ष, बिना भेदभाव और त्वरित तरीके से हुई है। इसके लिए हम राज्य सरकार को साधुवाद देते हैं। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होगी।"

उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि उच्चतम न्यायालय प्रदेश सरकार के कार्यों की सराहना करेगा और त्वरित एवं पारदर्शी कार्रवाई को देखते हुए इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। हम न्यायपालिका पर विश्वास करने वाले लोग हैं। जो भी निर्णय आएगा, वह स्वीकार्य होगा और निश्चित तौर पर अच्छा एवं न्यायपूर्ण होगा।"

अरविंद केजरीवाल द्वारा राम मंदिर चढ़ावा मामले में दोषियों को फांसी देने की मांग पर सीताराम दास महाराज ने कहा, "मैं पूछना चाहता हूं कि केजरीवाल जी कोई न्याय के व्यक्ति हैं क्या? क्या वे कोई संवैधानिक संस्था हैं? क्या वे न्यायपालिका का हिस्सा हैं? जो इस तरह की बातें कह रहे हैं। अगर वे संविधान और न्याय व्यवस्था में विश्वास करने वाले होते, तो जब उनके ऊपर आरोप लगे और उन्हें जेल जाना पड़ा, तब वह अपने पद से इस्तीफा दे देते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।"

उन्होंने केजरीवाल के बयान को दुखद और निंदनीय बताते हुए कहा कि न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए। किसी व्यक्ति के कहने से किसी को फांसी नहीं हो सकती और किसी के कहने से सजा नहीं रुक सकती।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोग तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं और उनकी विचारधारा को समाज स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समय-समय पर अपना रूप बदलते हैं और उन्हें न तो सनातन से आस्था है, न सनातन से प्रेम है और न ही राम जन्मभूमि और रामलला से प्रेम है। अगर उन्हें वास्तव में रामलला से प्रेम होता तो जब राम मंदिर का निर्माण हुआ, तब उसका विरोध नहीं करते।

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे द्वारा विपक्ष को औरंगजेब का वंशज बताए जाने पर सीताराम दास महाराज ने कहा, "निश्चित तौर पर मैं नितेश राणे जी के इस वक्तव्य का समर्थन करता हूं और उनकी विचारधारा से सहमत हूं।"

उन्होंने कहा, "आज वही लोग सनातन और राम के प्रति अपनी आस्था दिखाने का प्रयास कर रहे हैं जो कभी उनके अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। ऐसे लोगों को समाज पहचान चुका है और आने वाले समय में जनता उनके चेहरे को बेनकाब करेगी।"

उन्होंने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग पहले आतंकवादियों के पक्ष में खड़े होते थे, आज उनका राम और सनातन के प्रति प्रेम दिखाना चिंता का विषय है।

--आईएएनएस

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