एसआईआर में जो नाम कटे सही हैं, घुसपैठिये देश के संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे थे: चिराग पासवान
पटना, 3 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने को सही ठहराया। इंडिया ब्लॉक की रामलीला मैदान रैली पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर करोड़ों गलत नाम कटे होते तो लोग सड़क पर आते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि विपक्ष सत्ता लालच में मर्यादाएं चौपट कर रहा है, जबकि पीएम मोदी विकसित भारत के निर्माण में लगे हैं।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, "एसआईआर के तहत जो नाम कट रहे हैं, ये वे नाम हैं जो सही मायनों में अवैध रूप से हमारे देश के साधन-संसाधनों का लंबे समय से दुरुपयोग कर रहे थे। मैं बार-बार इस बात को कहता हूं कि जो लोग कह रहे हैं कि नाम गलत कटे हैं, गलत तरीके से कटे हैं, तो आपके बीएलए क्या कर रहे हैं? आपके बीएलए वहां मौजूद हैं न। आपके बूथ-लेवल एजेंट इस बात को क्रॉस-चेक करते हैं?"
उन्होंने कहा कि अगर मान लीजिए किसी बीएलओ द्वारा एक गलत नाम कट भी गया हो और कई बार गलतियां होती हैं, तो उसका नाम दोबारा जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। पर ऐसे में सिर्फ इस बात को लेकर विपक्ष जिस तरीके से हंगामा कर रहा है, रामलीला मैदान तक ये लोग चले गए कि 10 लाख लोग इकट्ठा करेंगे। 140 करोड़ की आबादी में 1 लाख 40 हजार लोग भी ये लोग इकट्ठा नहीं कर पाए। उसके बाद ये लोग दावे कर रहे हैं कि इतने करोड़ गलत नाम कट गए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "आपको लगता है कि अगर कहीं इतनी बड़ी संख्या में गलत नाम कट जाएंगे तो क्या वे लोग सड़क पर नहीं आएंगे? क्या वे लोग हंगामा नहीं करेंगे?
चिराग पासवान ने कहा कि एसआईआर को लेकर हकीकत यह है कि जो नाम कटे हैं, सही कटे हैं। डुप्लिकेसी चल रही थी, जिनका निधन हो गया था, उनके नाम पर मतदान किया जा रहा था। ये वही नाम हैं जिन्हें काटा गया है, जिनमें वे घुसपैठिए भी शामिल हैं, जिनके पास यहां रहने का कोई आधार नहीं है। कई बार यही लोग असामाजिक तत्वों की आवाज बनने का काम करते हैं, देश में अराजकता फैलाने का काम करते हैं। इन्हीं लोगों के नाम काटे गए हैं। इसलिए केंद्रीय गृह मंत्री ने जो जानकारी दी, बिल्कुल सही दी।
उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने का लालच विपक्ष और खासतौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी में इतनी ज्यादा हो गया है कि ये मर्यादाओं, परंपराओं और देश को चलाने वाली तमाम चीजों को चौपट करना चाहते हैं। आप उठाइए उन मुद्दों को, जिनसे जनता का सुधार हो, जिससे जनता को फर्क पड़ता हो, जैसे सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य। जो भी विषय उठाने हैं, उठाइए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लेकिन एसआईआर का मुद्दा आप क्यों उठाएंगे? क्योंकि आपको अपनी सीटें कम होती हुई परेशान कर रही हैं। क्योंकि राज्यों में आपके मुख्यमंत्री कम होते जा रहे हैं। क्योंकि आप इतने समय से राजनीति में हैं, लेकिन आज तक किसी मंत्री या प्रधानमंत्री के पद तक नहीं पहुंच पाए। यह विषय सिर्फ और सिर्फ सत्ता हासिल करने का है।
उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ प्रधानमंत्री विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी ऊर्जा लगाने का काम कर रहे हैं और ये लोग सत्ता को कैसे गलत तरीके से हासिल किया जाए, उसी तरफ अपना ध्यान लगाए हुए हैं।
दो एमएलसी को भाजपा में मिलाने के मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुझे नहीं पता कि इसमें गठबंधन धर्म का विषय कहां से आता है। यह पूरी तरह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह किस दल का समर्थन करना चाहता है या नहीं। हां, जो कानूनी बाधाएं हैं, उनमें जॉइनिंग संभव है या नहीं, यह एक अलग विषय है। और नैतिकता भी एक बहुत बड़ा आधार है। जब आप एक गठबंधन के एक दल के खिलाफ चुनाव जीतकर आए हैं और फिर उसी गठबंधन के दूसरे सहयोगी के समर्थन की बात करते हैं, तो निश्चित रूप से उसमें नैतिकता दिखाई नहीं देती। लेकिन यदि कोई कानूनी बाधा या कानूनी अड़चन सामने आती है, तो वह जरूर चिंता का विषय होगा।
अनंत सिंह की सदस्यता जदयू से रद्द करने को लेकर उन्होंने कहा कि यह उनकी पार्टी का आंतरिक मामला है। चुनाव के दौरान जिस तरीके की उनकी भूमिका रही, उसको लेकर जनता दल यूनाइटेड ने उन पर कार्रवाई की मांग की है। मुझे लगता है कि कानून अपना काम करेगा।
अराजकता के खिलाफ भाजपा की यात्रा को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि यूपी ही नहीं, कई शहरों में अलग-अलग स्थानों पर हमारे जनप्रतिनिधि भी अपनी भागीदारी इस यात्रा में दे रहे हैं। भारत को अराजकता में झोंकने की जो सोच विपक्ष की है, वह गलत है। विपक्ष के पास ऐसे चेहरे और ऐसे नाम हैं जो बांग्लादेश का उदाहरण देते हैं, जो नेपाल जैसी व्यवस्था भारत में लाना चाहते हैं, जो सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। जैसे हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन के लिए संस्थाओं का दुरुपयोग होता है, वैसी सोच विपक्ष के कुछ लोग रखते हैं। इस सोच को न भारत की जनता और न ही हम लोग कभी सफल होने देंगे। उसी के खिलाफ यह मार्च निकाला जाता है।
--आईएएनएस
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