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एसआईआर के तहत झारखंड में 22.84 लाख मामलों का निष्पादन बाकी, नो मैपिंग में आधे से ज्यादा मामले लंबित

रांची, 4 नवंबर (आईएएनएस)। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने में अब महज 26 दिन बाकी हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन का काम अभी लंबित है। राज्य में नो मैपिंग और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के कुल 59.53 लाख मामलों में से अब तक 36.69 लाख मामलों का ही निष्पादन हो पाया है। यानी 22.84 लाख मामले अभी बाकी हैं। इनमें नो मैपिंग के 7.95 लाख और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के 14.88 लाख मामले शामिल हैं।
 

रांची, 4 नवंबर (आईएएनएस)। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने में अब महज 26 दिन बाकी हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन का काम अभी लंबित है। राज्य में नो मैपिंग और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के कुल 59.53 लाख मामलों में से अब तक 36.69 लाख मामलों का ही निष्पादन हो पाया है। यानी 22.84 लाख मामले अभी बाकी हैं। इनमें नो मैपिंग के 7.95 लाख और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के 14.88 लाख मामले शामिल हैं।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार की ओर से 4 नवंबर तक के जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में नो मैपिंग के कुल 14,04,033 मामलों में से 6,08,618 का निष्पादन कर ईसीआईनेट पर अपडेशन किया गया है। यह कुल मामलों का 43.35 प्रतिशत है। इस तरह इस श्रेणी में 7,95,415 मामले अभी लंबित हैं। लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के मामलों में स्थिति इससे बेहतर है। राज्य में ऐसे कुल 45,49,961 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 30,61,159 यानी 67.28 प्रतिशत का निष्पादन हो चुका है।

इसके बावजूद 14,88,802 मामलों का निपटारा बाकी है। नो मैपिंग के तहत उन मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच होती है, जिनका या उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं जुड़ पाया है। वहीं, लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में वर्तमान और पुरानी मतदाता सूची के विवरण में तार्किक विसंगतियों की जांच की जाती है। इसमें माता-पिता और बच्चों की उम्र में असामान्य अंतर या पारिवारिक संबंधों से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ी जैसे मामले शामिल हैं।

जिलावार आंकड़ों में नो मैपिंग के मामलों में पश्चिमी सिंहभूम 96.16 प्रतिशत निष्पादन के साथ सबसे आगे है। लोहरदगा में 80.04 प्रतिशत, देवघर में 75.25 प्रतिशत, रामगढ़ में 63.19 प्रतिशत और गुमला में 61.01 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। दूसरी ओर, गिरिडीह में केवल 19.52 प्रतिशत, साहिबगंज में 21.03 प्रतिशत, पलामू में 25.25 प्रतिशत, पाकुड़ में 28.86 प्रतिशत और रांची में 29.03 प्रतिशत मामलों का निष्पादन हुआ है।

लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के मामलों में पश्चिमी सिंहभूम 99.72 प्रतिशत और लोहरदगा 99.08 प्रतिशत निष्पादन के साथ सबसे आगे हैं। गुमला में 92.15 प्रतिशत, रामगढ़ में 86.74 प्रतिशत और सिमडेगा में 85.87 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस श्रेणी में पाकुड़ में 45.88 प्रतिशत, साहिबगंज में 48.57 प्रतिशत, पलामू में 49.55 प्रतिशत, रांची में 52.02 प्रतिशत और गढ़वा में 54.63 प्रतिशत मामलों का निष्पादन हुआ है।

अदर कैटेगरी के मामलों में राज्य ने 97.91 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है। कुल 1,61,65,853 मामलों में से 1,58,27,411 का निष्पादन कर ईसीआईनेट पर अपडेशन किया जा चुका है। इस श्रेणी में लोहरदगा ने शत-प्रतिशत काम पूरा कर लिया है। पश्चिमी सिंहभूम में 99.93 प्रतिशत, देवघर में 99.91 प्रतिशत, चतरा में 99.85 प्रतिशत और खूंटी में 99.79 प्रतिशत काम पूरा हुआ है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने का निर्देश दिया है। उन्होंने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों से नियमित समीक्षा करने और विशेष कार्ययोजना बनाकर सुनवाई व सत्यापन का काम पूरा करने को कहा है।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी