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सिक्किम टनल हादसे ने झारखंड के चार घरों की खुशियां छीनीं, गांवों में पसरा मातम

रांची, 23 जुलाई (आईएएनएस)। सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन टनल में हुए भीषण हादसे ने झारखंड के चार परिवारों की दुनिया उजाड़ दी है। रोजी-रोटी की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर काम करने गए झारखंड के चार मजदूरों की मौत की खबर बुधवार को जब उनके गांव पहुंची, परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
 

रांची, 23 जुलाई (आईएएनएस)। सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन टनल में हुए भीषण हादसे ने झारखंड के चार परिवारों की दुनिया उजाड़ दी है। रोजी-रोटी की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर काम करने गए झारखंड के चार मजदूरों की मौत की खबर बुधवार को जब उनके गांव पहुंची, परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है कि घर चलाने निकले बेटे और पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। हादसे में अब तक 22 की मौत हुई है, जिनमें झारखंड के चार मजदूर शामिल हैं। इनकी पहचान खूंटी जिले के रनिया प्रखंड स्थित डाहु गांव के कृष्णा साहू (22) और बडरू विकास कंडुलना (25), हजारीबाग जिले के बरही प्रखंड निवासी जगेश्वर ठाकुर (46) तथा पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुमसिंग मदुरा गांव निवासी मसीह बरजो (27) के रूप में हुई है।

चारों मजदूर एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना में निर्माणाधीन हेड रेस टनल (एचआरटी) में कार्यरत थे। उल्लेखनीय है कि टनल के भीतर खुदाई के दौरान मीथेन गैस का रिसाव होने के बाद तेज विस्फोट हुआ। इसके बाद टनल का एक हिस्सा ढह गया और अंदर जहरीली गैस तथा धुएं का गुबार फैल गया। हादसे के समय वहां काम कर रहे कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए।

मृतकों के गांवों में शोक का माहौल है। परिजन और ग्रामीण घटना की सूचना मिलने के बाद से सदमे में हैं। चारों मजदूर अपने परिवारों के लिए आजीविका का मुख्य सहारा थे। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण वे दूसरे राज्यों में मजदूरी करने गए थे। अब उनके असमय निधन से परिवारों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात कर झारखंड के मृतक और प्रभावित श्रमिकों के परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य के श्रम विभाग और प्रवासी श्रमिक (माइग्रेंट) सेल को सक्रिय कर दिया गया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सिक्किम प्रशासन, एनएचपीसी और झारखंड सरकार के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है। पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चारों शवों को सम्मानपूर्वक उनके पैतृक गांवों तक पहुंचाया जाएगा। शवों को सड़क और हवाई मार्ग के जरिए झारखंड लाने की तैयारी की जा रही है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

मृतकों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि की भी घोषणा की गई है। एनएचपीसी की ओर से पांच लाख रुपये, सिक्किम सरकार की ओर से चार लाख रुपये और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपये की सहायता दिए जाने की घोषणा की गई है।

--आईएएनएस

एसएनसी/एसके