श्यामा माई मंदिर: महाराज की चिता पर बना मंदिर, जहां श्मशान में होते हैं मांगलिक कार्य
दरभंगा, 5 मार्च (आईएएनएस)। 'मंदिरों की भूमि' कहे जाने वाले देश भारत में देवी-देवताओं के अनगिनत मंदिर मौजूद हैं। उन्हीं में से एक बिहार के दरभंगा जिले में स्थित 'श्यामा माई मंदिर' है, जो मां काली को समर्पित है।
श्यामा माई मंदिर बिहार के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है, जो दरभंगा राज परिवार के श्मशान घाट में महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर निर्मित है, इसलिए इस मंदिर को रामेश्वरी श्यामा माई के नाम से भी जाना जाता है।
श्यामा माई मंदिर की स्थापना दरभंगा के महाराज कामेश्वर सिंह ने 1933 में की थी। लाल रंग का यह मंदिर अपनी अनूठी पहचान, वास्तुकला और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, जो हरे-भरे पेड़ों के साथ तालाबों से घिरा हुआ है। मंदिर के गर्भगृह में मां काली की एक भव्य प्रतिमा है, जो भगवान शिव के ऊपर विराजमान है।
मंदिर की खासियत है कि यहां वैदिक और तांत्रिक दोनों विधियों से मां काली की भव्य पूजा और आरती की जाती है। मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु माता के दर्शन के साथ अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं। माना जाता है कि रामेश्वर सिंह एक बहुत बड़े साधक थे, इसलिए उनकी चिता पर मंदिर की स्थापना की गई।
सनातन धर्म में विवाह या अन्य मंगलकारी कार्य के समय श्मशान घाट नहीं जाते हैं, लेकिन श्यामा माई मंदिर की खासियत है कि यहां लोग शुभ कार्य जैसे मुंडन, उपनयन, शादी और अन्य मांगलिक कार्य करने के लिए आते हैं।
मंदिर के गर्भगृह में महाकाल और गणपति के दाहिनी ओर मां काली की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है। मां काली की इस प्रतिमा के चार भुजाएं हैं। दाहिना हाथ हमेशा माता के दर्शन को आए श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देता है।
मंदिर में प्रतिदिन आयोजित होने वाली आरती का विशेष महत्व है, जिसके इंतजार में आने वाले भक्त घंटों खड़े रहते हैं। कहा जाता है कि मंदिर में मौजूद मां काली की मूर्ति पेरिस से लाई गई थी। वहीं, मान्यता है कि श्यामा माई काली के चरणों के दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
श्यामा माई मंदिर में हमेशा चहल-पहल रहती है। नवरात्रि के दौरान, यहां का माहौल और वातावरण अद्भुत हो जाता है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण, परिसर में 'जय श्यामा माई' के जयकारे हर जगह गूंजते रहते हैं।
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