श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने सीईओ चयन पर भ्रम किया दूर, बताया- प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी
अयोध्या, 14 सितंबर (आईएएनएस)। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन को लेकर कुछ मीडिया में चल रही गलत जानकारी पर स्पष्टीकरण जारी किया है।
न्यास के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरी की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि न्यास तथ्यों को स्पष्ट करना चाहता है ताकि गलत जानकारी को संबोधित किया जा सके।
न्यास ने प्रलेखित तथ्य साझा करते हुए बताया कि 6 जुलाई 2026 को खोज समिति का गठन किया गया था। खोज समिति को कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। तीन शहरों, दिल्ली एनसीआर, पुणे और संबलपुर, में एआई स्क्रीनिंग और मैनुअल विशेषज्ञता के जरिए बहु-स्तरीय मूल्यांकन किया गया।
बताया गया कि मूल्यांकन के बाद 16 प्रत्याशियों को अंतिम रूप से चुना गया, जिन्होंने 11 और 12 अगस्त 2026 को अयोध्या में आमने-सामने की बातचीत में भाग लिया। एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्र ने 11 अगस्त 2026 को पहली पाली में साक्षात्कार प्रक्रिया में भाग लिया था। खोज समिति ने 1 सितंबर 2026 को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें न्यास को प्रस्तुत कीं।
बयान में बताया गया कि 2 सितंबर 2026 को न्यास ने अनुशंसित शीर्ष तीन प्रत्याशियों, जितेंद्र मिश्र, संजय प्रतापसिंह विश्वास राव और श्रुति भारद्वाज के नाम मीडिया के समक्ष सार्वजनिक किए।
न्यास ने कहा कि यह दावा कि जितेंद्र मिश्र 11-12 अगस्त को साक्षात्कार के दौर में शामिल नहीं थे, तथ्यात्मक रूप से गलत है। शीर्ष तीन अनुशंसित प्रत्याशियों में उनका शामिल होना उनकी भागीदारी, मूल्यांकन और योग्यता-आधारित चयन का दस्तावेजी प्रमाण है।
न्यास ने कहा कि चयन प्रक्रिया संस्थागत शासन और पारदर्शिता के सर्वोच्च मानकों के अनुसार आयोजित की गई थी। प्रत्येक चरण दस्तावेजीकृत था और सभी अंतिम उम्मीदवारों की पहचान अयोध्या में दर्ज की गई थी। न्यास ने दोहराया कि वह पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है और चयन प्रक्रिया के संबंध में किसी भी जांच के लिए तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करना जारी रखेगा।
--आईएएनएस
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