Aapka Rajasthan

श्रावणी मेला: आस्था के साथ अरबों का कारोबार, सुल्तानगंज की अर्थव्यवस्था का आधार

भागलपुर, 21 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के भागलपुर स्थित अजगैबीनाथ गंगाधाम सुल्तानगंज में लगने वाला एक महीने का श्रावणी मेला सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं बल्कि अरबों रुपये के कारोबार का महाकुंभ भी है। यह मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था की मुख्य रीढ़ बन चुका है, जिससे हजारों परिवारों को पूरे साल की जीविका मिलती है।
 

भागलपुर, 21 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के भागलपुर स्थित अजगैबीनाथ गंगाधाम सुल्तानगंज में लगने वाला एक महीने का श्रावणी मेला सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं बल्कि अरबों रुपये के कारोबार का महाकुंभ भी है। यह मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था की मुख्य रीढ़ बन चुका है, जिससे हजारों परिवारों को पूरे साल की जीविका मिलती है।

सुल्तानगंज में हर साल सावन के महीने में 25 हजार से अधिक अस्थायी दुकानें लगती हैं। जमीन के किराए से लेकर पूजा सामग्री, कांवर, गेरुआ वस्त्र और यहां तक कि गंगा तट पर मुफ्त मिलने वाली साधारण मिट्टी भी यहां मूल्यवान वस्तु बनकर बिकती है। इससे लाखों-करोड़ों रुपये का कारोबार होता है।

मेले का असर सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। पर्यटन और परिवहन सेक्टर में भी जबरदस्त उछाल आता है। होटल, नाव सेवा, ऑटो-टैक्सी चालकों की आय में कई गुना वृद्धि होती है। फूल बेचने वाले और खान-पान के छोटे विक्रेताओं को भी बड़ा आर्थिक संबल मिलता है।

पिछले 35 वर्षों से तीर्थ पुरोहित का काम संभाल रहे चुन्नू-मुन्नू उर्फ लाल मोहरिया पंडा ने आईएएनएस को बताया कि श्रावणी मेले में न सिर्फ देश-विदेश से कांवरिये अजगैबीनाथ पहुंचते हैं बल्कि ब्राह्मण, पंडित और पुजारी भी बड़ी संख्या में आते हैं।

मेले की अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "एक कांवरिया का गंगाधाम से बाबाधाम (देवघर) तक का खर्च करीब 6,000 से 7,000 रुपये होता है। महीने भर में करोड़ों लोग यहां आते हैं। आज दो घंटे में ही सवा से डेढ़ लाख लोग जल भरकर निकले हैं। यूपी, बंगाल और नेपाल जैसे सात-आठ राज्यों से लोग यहां सिर्फ कमाने के लिए आते हैं।"

हालांकि उन्होंने चिंता भी जताई कि मेले में बिकने वाला ज्यादातर सामान बंगाल, यूपी और दिल्ली जैसे राज्यों से आता है। अगर सरकार स्थानीय स्तर पर इन उत्पादों के निर्माण पर ध्यान दे, तो स्थानीय लोगों की कमाई और भी बढ़ सकती है।

वहीं, इकोनॉमिक्स के छात्र रहे भागलपुर के एसडीएम विकास कुमार ने आईएएनएस को बताया कि सावन के एक महीने की कमाई से लोगों के साल भर की जीविका का आधार बन जाता है। इस बार 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम