यूबीटी सांसदों के दलबदल मामले पर ओम बिरला से मिले अरविंद सावंत-अनिल देसाई
नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के नेता अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर पार्टी के सांसदों के कथित दलबदल के मामले को उठाया। दोनों नेताओं ने लोकसभा स्पीकर से मांग की कि इस मामले में कोई भी फैसला संविधान और दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत लिया जाए।
बैठक के बाद शिवसेना (यूबीटी) सांसद अनिल देसाई ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के सभी नौ सांसद शिवसेना (यूबीटी) के नाम और चुनाव चिह्न 'मशाल' पर चुनाव जीतकर आए थे। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का बदलाव संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार ही हो सकता है।
अनिल देसाई ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची में दलबदल को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। उन्होंने कहा कि किसी विधायक दल या सांसदों के समूह की संख्या चाहे कितनी भी हो, वह सीधे तौर पर किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इस मामले में संविधान के नियमों का पालन जरूरी है।
देसाई ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह पूरी तरह संविधान में दिए गए नियमों और प्रावधानों के आधार पर होगा। उन्होंने कहा कि स्पीकर कार्यालय ने मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच करने और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी ने लोकसभा अध्यक्ष को कोई आवेदन दिया है तो उसकी जानकारी और उसमें रखी गई बातों की जांच की जाएगी। शिवसेना (यूबीटी) नेता अब इस प्रक्रिया के आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत ने कहा कि पार्टी के कुछ सांसदों के दूसरी पार्टी में शामिल होने के मामले को लेकर उन्होंने पहले भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र दिया था। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करना लोकसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी है और किसी भी सांसद या समूह के दूसरी पार्टी में शामिल होने से पहले संवैधानिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।
सावंत ने कहा कि 18 जून को उन्होंने और अनिल देसाई ने लोकसभा अध्यक्ष को आवेदन देकर आग्रह किया था कि इस मामले में पार्टी का पक्ष सुने बिना कोई फैसला न लिया जाए। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान उन्होंने पूछा कि क्या संबंधित सांसदों की ओर से कोई औपचारिक पत्र या आवेदन दिया गया है।
अरविंद सावंत के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि उनके कार्यालय को अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक पत्र नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि बैठक में संविधान के संबंधित प्रावधानों पर भी चर्चा हुई।
शिवसेना (यूबीटी) नेताओं का कहना है कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों के मामले में अंतिम निर्णय संविधान और दलबदल कानून के अनुसार ही होना चाहिए।
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