शिक्षक भर्ती विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी सरकार से 10 दिन में मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली, 4 फरवरी (आईएएनएस)। यूपी में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार से अहम सवाल पूछा कि क्या रिजर्व लिस्ट में रखे गए करीब 6800 अभ्यर्थियों को समायोजित किया जा सकता है या नहीं? इस पर यूपी सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे पर सरकार से सलाह लेकर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
वकील ने यह भी कहा कि सरकार को इस प्रस्ताव पर मूलरूप से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे लागू करने से पहले पूरी प्रक्रिया, नियम और कानूनी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। सरकार सीधे इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति का फैसला नहीं ले सकती। इसके लिए आपसी सलाह-मशविरा जरूरी है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने इस मामले को और व्यापक नजरिए से देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि सिर्फ 6800 रिजर्व अभ्यर्थियों तक ही बात सीमित न रखी जाए, बल्कि इससे ज्यादा अभ्यर्थियों की बहाली पर भी सरकार विचार करे। जस्टिस दत्ता ने यह आशंका भी जताई कि अगर भविष्य में कोई अन्य अभ्यर्थी कोर्ट आकर यह दावा करता है कि वह मेरिट लिस्ट में आता है और उसे भी नौकरी मिलनी चाहिए तो सरकार के सामने फिर नई कानूनी परेशानी खड़ी हो सकती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह 10 दिनों के भीतर इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति साफ करे और कोर्ट को पूरी जानकारी दे। इसमें यह भी बताना होगा कि कितने अभ्यर्थियों को और किन शर्तों पर नियुक्त किया जा सकता है।
बता दें कि इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जून 2020 और जनवरी 2022 की चयन सूचियों को रद्द कर दिया था। साथ ही यूपी सरकार को निर्देश दिया था कि वह 2019 में हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा (एटीआरई) के आधार पर 69 हजार शिक्षकों के लिए नई चयन सूची तीन महीने के भीतर जारी करे।
--आईएएनएस
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