शिक्षा मंत्री ने की समीक्षा, छात्रों तक एनसीईआरटी की किताबें पहुंचाने पर फोकस
नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता, छपाई और वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। यह बैठक स्कूलों के मौजूदा शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखते हुए बुलाई गई थी, ताकि छात्रों को समय पर किताबें सुनिश्चित की जा सकें। गौरतलब है कि देश के विभिन्न हिस्सों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत के साथ ही एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों की कमी ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर कक्षा 9 के विद्यार्थियों को कई विषयों की किताबें समय पर नहीं मिल पाई हैं। कुछ पुस्तकों की आपूर्ति हाल के दिनों में शुरू हुई है, जबकि कई छात्र अब भी जरूरी किताबों का इंतजार कर रहे हैं। इस स्थिति का असर पढ़ाई की गति पर पड़ रहा है।
पाठ्यक्रम की पुस्तकों की यह कमी केवल ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक सीमित नहीं है बल्कि दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भी यह समस्या है। इस पृष्ठभूमि में कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री कि यह समीक्षा बैठक काफी महत्वपूर्ण रही। बैठक में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार सहित शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने आगामी एनसीईआरटी पुस्तकों की तैयारी की भी समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किताबों के स्टॉक की स्थिति का आकलन किया और वितरण एजेंसियों तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय की स्थिति पर भी चर्चा की। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों तक समय पर किताबें पहुंचाने को लेकर विशेष जोर दिया गया।
धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किताबों की आपूर्ति में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी छात्र को असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को सप्लाई चेन को और मजबूत बनाने, जरूरत पड़ने पर छपाई क्षमता बढ़ाने और अंतिम चरण यानी ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ की निगरानी को सख्त करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही मंत्री ने यह भी बताया कि जब तक सभी छात्रों तक पुस्तकें नहीं पहुंच जातीं, तब तक डिजिटल माध्यम एक महत्वपूर्ण सहारा बन सकता है। उन्होंने ई-पाठशाला प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध डिजिटल पाठ्यपुस्तकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया, ताकि छात्रों की पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके। सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर देख रही है और जल्द ही सभी छात्रों तक आवश्यक पुस्तकें पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
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