Aapka Rajasthan

शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर जीतन राम मांझी ने उठाए सवाल, बोले- बिहार में लागू हो गुजरात मॉडल

पटना, 9 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नशाबंदी का कानून सही होना चाहिए, लेकिन इसके क्रियान्वयन में गड़बड़ी के कारण कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने की अपील की।
 

पटना, 9 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नशाबंदी का कानून सही होना चाहिए, लेकिन इसके क्रियान्वयन में गड़बड़ी के कारण कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने की अपील की।

जीतन राम मांझी ने कहा, "नशाबंदी का जो कानून है, वह ठीक कानून होना चाहिए। उसके इंप्लीमेंटेशन में गड़बड़ी होने से कहीं-कहीं अनेक प्रकार की बातें सामने आती हैं।" उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी को लेकर सरकार को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए, जिससे आम लोगों को परेशानी नहीं हो और कानून का दुरुपयोग भी न हो। मांझी ने गुजरात में लागू शराबबंदी का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में भी उसी मॉडल को लागू किया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "जहां गांधी जी का जन्म हुआ था, वहां भी शराबबंदी है, लेकिन वहां लोगों में निराशा नहीं है। हम तो पहले से ही कह रहे हैं कि गुजरात मॉडल की शराबबंदी बिहार में लागू हो।" मांझी ने शराबबंदी कानून के कारण गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के खिलाफ दर्ज होने वाले मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून के क्रियान्वयन में खामियों का फायदा उठाकर कुछ पदाधिकारी पैसे अर्जित करते हैं और गरीब लोगों को फंसाया जाता है।

उन्होंने कहा, "शराबबंदी के चलते पदाधिकारी लोग पैसा अर्जित करते हैं और गरीबों को फंसाते हैं। आज 11-12 लाख लोगों पर किसी न किसी प्रकार का केस मुकदमा है, जिसमें हमारे छह-सात गरीब लोगों पर भी केस है।" मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया कि शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे कानून का पालन भी हो और निर्दोष लोगों को परेशान भी न किया जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार को शराबबंदी कानून की समीक्षा करते हुए उसके क्रियान्वयन में मौजूद कमियों को दूर करना चाहिए। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि कानून का दुरुपयोग न हो और गरीबों को अनावश्यक रूप से मुकदमों में न फंसाया जाए।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी