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शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार, लेकिन सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने से बचें: इफ्राहिम हुसैन

अलीगढ़, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफ्राहिम हुसैन ने लोगों से शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐसे कार्यक्रम या विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने से बचना चाहिए, जिससे आपसी भाईचारा प्रभावित हो और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति बने। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना और न्याय की मांग करना संवैधानिक अधिकार है, बशर्ते यह शांतिपूर्ण तरीके से किया जाए।
 

अलीगढ़, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफ्राहिम हुसैन ने लोगों से शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐसे कार्यक्रम या विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने से बचना चाहिए, जिससे आपसी भाईचारा प्रभावित हो और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति बने। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना और न्याय की मांग करना संवैधानिक अधिकार है, बशर्ते यह शांतिपूर्ण तरीके से किया जाए।

मौलाना चौधरी इफ्राहिम हुसैन ने चीफ इमाम डॉ. उमैर इलियासी की उस अपील पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुसलमानों से ऐसे कार्यक्रमों और प्रदर्शनों से दूर रहने की बात कही गई थी, जिनसे शांति व्यवस्था और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचे। शांति बनाए रखने की अपील उचित है, लेकिन संवैधानिक दायरे में रहकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने में कोई हर्ज नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए मौलाना ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में सरकार को निशाना बनाने के उद्देश्य से प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक तौर पर लोगों को गुमराह करके आंदोलनों में शामिल कराया जा सकता है। उनके मुताबिक, न्याय, ईमानदारी और समानता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है और किसी भी मुद्दे को इन्हीं आधारों पर देखा जाना चाहिए।

मौलाना ने कुछ प्रदर्शनकारियों पर खुद को पीड़ित के रूप में पेश करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग स्वयं अन्याय करने में शामिल रहे हैं, लेकिन अब पीड़ित होने का दावा कर रहे हैं। यदि सरकार अन्याय खत्म करने और समानता स्थापित करने के लिए कदम उठा रही है, तो ऐसे प्रयासों का विरोध करने के पीछे के कारणों पर भी विचार किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों को मौलाना ने सुझाव दिया कि वे अपने आचरण का आकलन करें और विचार करें कि वे स्वयं न्याय, ईमानदारी, शांति और समानता के सिद्धांतों का कितना पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कारणों से न्याय और शांति की दिशा में किए जाने वाले प्रयास बाधित नहीं होने चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि वह अधिकारों की लड़ाई लड़ने या प्रदर्शन करने के खिलाफ नहीं हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना संवैधानिक अधिकार है। लेकिन किसी भी आंदोलन का उद्देश्य ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़े या शांति व्यवस्था प्रभावित हो। मौलाना ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य और अपने कदमों के परिणामों पर विचार करें। न्याय और समानता की मांग के साथ-साथ अमन और आपसी भाईचारा बनाए रखना भी जरूरी है।

--आईएएनएस

पीएसके