टैगोर की रचनाएं और 'लोकटक टी' समेत देसी रंग में रचे-बसे उपहार प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडिश पीएम को किए भेंट
नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की यात्रा संपन्न कर स्वदेश लौट आए हैं। चार यूरोपीय देशों का दौरा किया इनमें से एक दुनिया का चौथा सबसे खुशहाल देश स्वीडन भी था। प्रधानमंत्री ने यहां शिष्टाचार के तौर पर भारत के अध्यात्म, साहित्य, संस्कृति और विशेषता को दर्शाते उपहार अपने समकक्ष पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन और क्राउन प्रिंसेस को दिए।
पीएम मोदी ने स्वीडन के क्रिस्टर्सन को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं का संसार 'वर्ड्स ऑफ मास्टर' भेंट किया। गुरुदेव 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली साहित्यिक और दार्शनिक व्यक्तित्वों में से एक थे। वर्ष 1913 में उन्हें उनकी कृति 'गीतांजलि' के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला और वे यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय थे।
बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़े टैगोर के विचार स्वतंत्रता, करुणा, प्रकृति और साझा मानवता जैसे विषयों पर आधारित थे। नोबेल परंपरा और स्वीडन यात्राओं के कारण उनका स्वीडन से विशेष बौद्धिक संबंध रहा।
'वर्ड्स ऑफ मास्टर' संग्रह सत्य, प्रेम और स्वतंत्रता पर उनके विचारों को संक्षिप्त और चिंतनशील रूप में प्रस्तुत करता है। यह केवल साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि भारत और स्वीडन के बीच ज्ञान, रचनात्मकता और संस्कृति के साझा सम्मान का प्रतीक भी है।
इसके साथ ही भारत के प्रधानमंत्री ने अपने स्वीडिश समकक्ष को पश्चिम बंगाल की माटी में रचा बसा हैंडमेड शांतिनिकेतन मैसेंजर बैग भी गिफ्ट किया। शांतिनिकेतन का लेदर आर्ट आज भी कला पारखियों के नजरों में खास जगह रखता है। यह एक ज्योग्रिफिकल इंडिकेशन (जीआई) संरक्षित शिल्प है, जो बीरभूम जिले के सैकड़ों कारीगरों को आजीविका प्रदान करता है। बैग टैगोर की कलात्मक दृष्टि और आधुनिक फैशन के बीच एक सेतु का कार्य करता है।
शांतिनिकेतन गुरुदेव रबिंद्रनाथ टैगोर की कल्पना का ही मूर्त रूप है। पारंपरिक लोक कलाओं और आधुनिक वैश्विक सौंदर्यशास्त्र के समन्वय से टैगोर ने कला की अनूठी भाषा विकसित की, जिसने ग्रामीण समुदायों को सम्मानजनक और स्थायी अभिव्यक्ति का माध्यम प्रदान किया।
क्रिस्टर्सन को सेवन सिस्टर्स में से एक की वादियों में उपजी लोकटक टी भी उपहार स्वरूप दी गई। लोकटक पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। लोकटक झील के आसपास की पहाड़ियों में उगाई जाने वाली विशेष चायपत्ती की डिमांड खूब है। मणिपुर की अनूठी पारिस्थितिकी, तैरते “फुमदी” द्वीपों और समृद्ध जैव विविधता के बीच यह चाय सामुदायिक और रसायन-मुक्त खेती से तैयार की जाती है। झील के आसपास का धुंध से ढका वातावरण इस चाय को विशिष्ट स्वाद और शुद्धता प्रदान करता है।
स्वीडिश पीएम ने प्रधानमंत्री मोदी का हवाई अड्डे पर बाहें फैलाकर गर्मजोशी से स्वागत किया था। कुछ ऐसी ही गर्माहट उस उपहार में दिखी जो भारत की ओर से उन्हें सप्रेम भेंट की गई। उन्हें लद्दाख की शुद्ध ऊन से बुनी स्टोल ससम्मान दी गई।
लद्दाख का शुद्ध ऊन स्टोल, जिसे पश्मीना शॉल भी कहा जाता है, हिमालय की आत्मा को धारण करता है। यह 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले चांगथांग पठार में पाए जाने वाले चांगथांगी बकरियों के मुलायम ऊन से तैयार किया जाता है।
स्थानीय महिलाएं इस ऊन को हाथ से कातती हैं और पारंपरिक करघों पर पीढ़ियों से चली आ रही तकनीकों से इसे बुना जाता है। प्राकृतिक रंगों और स्थानीय उत्पादन के कारण यह शिल्प पूरी तरह टिकाऊ और प्रामाणिक है। यह शॉल प्रकृति से जुड़ाव, धैर्य और संतुलित जीवन का प्रतीक है, जो स्वीडन की सांस्कृतिक परंपराओं और प्राकृतिक जीवन-दृष्टि से गहराई से मेल खाता है।
प्रधानमंत्री स्वीडन यात्रा के दौरान क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया से भी मिले और उन्हें उपहार स्वरूप देसी रंग में डूबी गोंड पेंटिंग सौंपी। ये चित्रकारी मध्य प्रदेश की गोंड जनजाति की एक जीवंत पारंपरिक कला है। यह मान्यता है कि “अच्छी छवि देखने से सौभाग्य आता है,” और इसी विश्वास से यह कला त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर दीवारों और फर्शों पर बनाई जाती थी।
गोंड कलाकार बारीक रेखाओं, बिंदुओं और चमकीले रंगों के माध्यम से पशु-पक्षियों, जंगलों और प्रकृति को जीवंत रूप में दर्शाते हैं। प्रकृति का हर तत्व एक साझा जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा माना जाता है। स्वीडन की स्थिरता, डिजाइन और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना गोंड कला के दर्शन से गहराई से जुड़ती है।
इसके साथ ही क्राउन प्रिंसेस को प्रधानमंत्री की लिखी 'कनविनिएंट एक्शन: कंटिन्यूटी फॉर चेंज' किताब भी भेंट की गई। यह किताब पीएम मोदी के भाषणों, विचारों और नीतिगत दृष्टिकोणों का संग्रह है। पुस्तक शासन, विकास और राष्ट्रीय प्रगति के लिए उनके दृष्टिकोण को प्रस्तुत करती है।
पुस्तक में यह विचार प्रमुख है कि स्थायी प्रगति के लिए पुरानी नीतियों की निरंतरता बनाए रखते हुए नए सुधारों और बदलावों को अपनाना आवश्यक है। इसमें सुशासन, समावेशी विकास, आर्थिक सुधार और प्रशासनिक दक्षता जैसे विषयों पर चर्चा की गई है।
यह पुस्तक समकालीन भारत में नेतृत्व और शासन के सिद्धांतों की झलक प्रस्तुत करती है।
स्वीडन को भेंट किए गए उपहार में छिपा संदेश था। संदेश जो भारत और स्वीडन के विचारों को एक सूत्र में पिरोने का काम करता है। हर उपहार में भारत के मिट्टी की सुगंध थी।
--आईएएनएस
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