शालीमार बाग मस्जिद का मामला कोर्ट में पेंडिंग, फिर रात में क्यों चला बुलडोजर : वारिस पठान
मुंबई, 23 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के शालीमार बाग में मस्जिद पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रवक्ता वारिस पठान ने सरकार पर जुबानी हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद को रात के अंधेरे में तोड़ा गया, जबकि यह मामला अदालत में लंबित है। उन्होंने चुनाव आयोग के एसआईआर को लेकर सामने आए कथित मतभेदों पर भी सवाल उठाते हुए आयोग से जनता के सामने जवाब देने की मांग की।
वारिस पठान ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने 'ऑपरेशन मुसलमान' और 'ऑपरेशन मस्जिद' शुरू कर दिया है। दिल्ली के शालीमार बाग के पास रात में बुलडोजर ले जाकर मस्जिद को तोड़ा गया। असदुद्दीन ओवैसी के संज्ञान में मामला आने के बाद दिल्ली के पार्टी अध्यक्ष शोएब जमई समेत पार्टी की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शुरुआत में टीम को अंदर जाने से रोका। शोएब जमई ने इमाम और ट्रस्टी से मिलने के लिए अंदर जाने की मांग की और धरने पर बैठ गए, जिसके बाद पुलिस ने जाने दिया।
पठान ने कहा कि टीम मस्जिद के अंदर से कुरान शरीफ, हदीस और जानमाज जैसी धार्मिक सामग्री बाहर निकालने में सफल रही। उन्होंने सवाल उठाया कि मस्जिद के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई? यदि मामला अदालत में लंबित है तो रात के अंधेरे में बुलडोजर ले जाकर कार्रवाई करना सवाल खड़े करता है। उन्होंने सहारनपुर की मस्जिद का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इसी तरह अन्य मस्जिदों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
एसआईआर को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति से जुड़े दावों पर वारिस पठान ने कहा कि इस मुद्दे पर सामने आई रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यदि चुनाव आयुक्तों के स्तर पर किसी तरह के ऑब्जेक्शन रिकॉर्ड पर हैं तो चुनाव आयोग को देश के सामने आकर सवालों के जवाब देने चाहिए। मतदान का अधिकार किसी को दिया गया कोई एहसान नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है या उसके वोट देने के अधिकार को बिना उचित प्रक्रिया के सीमित किया जाता है तो यह गंभीर मामला है।
पठान ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वास्तविक और योग्य मतदाता का अधिकार छीनना नहीं है, लेकिन एसआईआर को लेकर उठ रहे सवालों का सरकार और चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े मामले और मुस्लिम महिलाओं के लिए विरासत में बराबर अधिकार की मांग वाली सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर वारिस पठान ने कहा कि उन्होंने अभी याचिका पढ़ी नहीं है। वह अधिवक्ता के तौर पर पहले याचिका के बिंदुओं और उसमें उठाए गए मुद्दों को समझना चाहेंगे। इसके बाद ही वह इस पर अपनी राय देंगे।
पठान ने कहा कि इस्लाम में मां के पैरों के नीचे जन्नत बताई गई है और इससे महिला तथा मां को दिए गए सम्मान को समझा जा सकता है।
--आईएएनएस
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