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शबाना और दीपा की 'ट्विनिंग' ने खींचा सबका ध्यान, बीच में 'कलर पॉप' बनीं नंदिता दास

मुंबई, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। अभिनेत्री शबाना आजमी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। वह अक्सर अपने प्रशंसकों के साथ निजी जिंदगी और दोस्तों के साथ बिताए गए पलों की झलकियां शेयर करती रहती हैं। शनिवार को भी अभिनेत्री ने कुछ ऐसा ही किया।
 
शबाना और दीपा की 'ट्विनिंग' ने खींचा सबका ध्यान, बीच में 'कलर पॉप' बनीं नंदिता दास

मुंबई, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। अभिनेत्री शबाना आजमी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। वह अक्सर अपने प्रशंसकों के साथ निजी जिंदगी और दोस्तों के साथ बिताए गए पलों की झलकियां शेयर करती रहती हैं। शनिवार को भी अभिनेत्री ने कुछ ऐसा ही किया।

अभिनेत्री शबाना आजमी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उनके साथ मशहूर निर्देशक व स्क्रीन राइटर दीपा मेहता और जानी-मानी अभिनेत्री-निर्देशक नंदिता दास भी नजर आ रही हैं। तस्वीर की सबसे खास बात शबाना और दीपा का पहनावा रहा। दोनों ने संयोग से बिल्कुल एक जैसे रंग और प्रिंट के दुपट्टे ओढ़े हुए हैं। इस 'ट्विनिंग' को देखकर खुद शबाना भी हैरान रह गईं और उन्होंने इसे एक मजेदार मोड़ देते हुए पोस्ट किया।

तस्वीर में तीनों की बॉन्डिंग साफ देखने को मिल रही है, जहां दीपा और शबाना नीले और सफेद प्रिंट वाले दुपट्टे में दिख रही हैं, वहीं नंदिता दास पीले रंग के लिबास में उनके बीच की 'कलर मोनोटोनी' को तोड़ती नजर आ रही हैं।

अभिनेत्री ने लिखा, "दीपा मेहता और मैं बिल्कुल एक जैसे दुपट्टे पहन रहे हैं, वो भी सिर्फ संयोग से। अच्छा है कि नंदिता दास ने पीला रंग पहना है।"

शबाना का पोस्ट फैंस को काफी पसंद आ रहा है। वे इस तिकड़ी को एक साथ देखकर काफी खुश हैं। यूजर्स कमेंट सेक्शन में इस इत्तेफाक की तारीफ कर रहे हैं।

अभिनेत्री को पिछली बार स्क्रीन पर क्राइम थ्रिलर 'डब्बा कार्टेल' में देखा गया था। हितेश भाटिया द्वारा निर्देशित इस सीरीज में अंजलि आनंद, ज्योतिका, साई ताम्हणकर, शालिनी पांडे, जीशु सेनगुप्ता, लिलेट दुबे, भूपेंद्र जादावत और गजराज राव जैसे कलाकार शामिल थे।

अभिनेत्री जल्द ही राजकुमार संतोषी के अपकमिंग एक्शन ड्रामा 'लाहौर 1947' में दिखाई देंगी। आमिर खान प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित इस फिल्म में सनी देओल, प्रीति जिंटा, अली फजल और करण देओल मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।

यह प्रसिद्ध नाटककार असगर वजाहत के नाटक 'जिस लाहौर नई देख्या, ओ जम्याई नी' (जिसने लाहौर नहीं देखा, वह जन्मा ही नहीं) पर आधारित है। यह विभाजन के दौरान की एक संवेदनशील और भावनात्मक कहानी है।

--आईएएनएस

एनएस/डीकेपी