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सेंगोल बनाने वाले वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन, पीएम मोदी और तमिलनाडु के राज्यपाल ने जताया शोक

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत की आजादी के समय ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन हो गया है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शोक व्यक्त किया है।
 

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत की आजादी के समय ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन हो गया है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शोक व्यक्त किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'एक्स' पर पोस्ट में लिखा, "तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु के निधन से गहरा दुख हुआ। तमिलनाडु के एक प्रतिष्ठित परिवार से आने वाले एथिराजुलु को उनके द्वारा पूर्व पीएम नेहरू को भेंट किए गए ऐतिहासिक सेंगोल के लिए याद किया जाएगा। कई साल बाद 2023 में केंद्र सरकार को नए संसद भवन में सेंगोल को गौरव का स्थान देने का सम्मान मिला। उस दौरान मुझे तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु से मिलने और राष्ट्र और संस्कृति के लिए उन्होंने जो किया है, उसके लिए आभार व्यक्त करने का सम्मान मिला।"

पीएम मोदी ने लिखा, "उनका जीवन और शिल्प कौशल भारत की गौरवशाली परंपराओं और हमारी राष्ट्रीय यात्रा के बीच एक उल्लेखनीय संबंध का प्रतिनिधित्व करता है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदना। ओम शांति।"

तमिलनाडु राजभवन (लोकभवन) की ओर से भी शोक संदेश जारी किया गया। तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा, "तिरु वुम्मिदी एथिराजुलु, जिन्होंने 1947 में 20 साल की छोटी उम्र में पवित्र सेंगोल के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, का निधन हो गया है। सेंगोल के निर्माण में उनका योगदान, जो भारत की सभ्यतागत विरासत, धर्मपूर्ण शासन और स्वतंत्रता की शुरुआत में सत्ता हस्तांतरण का एक कालातीत प्रतीक है, हमेशा श्रद्धा और गर्व के साथ याद किया जाएगा।"

उन्होंने कहा, "उनका जीवन और शिल्प कौशल हमारे राष्ट्र के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का हिस्सा बन गया है। मैं उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि उन्हें दुख की इस घड़ी में शक्ति और सांत्वना मिले। उनकी आत्मा को शाश्वत शांति मिले।"

बता दें कि वुम्मिदी एथिराजुलु ने 1947 में महज 20 साल की उम्र में पवित्र सेंगोल बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। सेंगोल भारत की सभ्यतागत विरासत, न्यायपूर्ण शासन और आजादी की दहलीज पर सत्ता के हस्तांतरण का एक कालातीत प्रतीक है।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम