एससीओ कॉन्फ्रेंस में पाक मंत्री को नहीं बुलाना चाहिए, निमंत्रण वापस ले सरकार : मौलाना रजवी बरेलवी
बरेली, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी मंत्री को आमंत्रित किए जाने पर भारत सरकार के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय से इस निमंत्रण पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की अपील की। उन्होंने पाकिस्तान को अमेरिकी समर्थन देने के मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आलोचना का समर्थन किया। इसके अलावा, बरेलवी ने उत्तर प्रदेश सरकार से जौहर यूनिवर्सिटी को अपने नियंत्रण में लेने की मांग की और अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर जाने को लेकर भी टिप्पणी की।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद नई दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन की कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है, जिसमें भारत सरकार ने पाकिस्तान के एक मंत्री को आमंत्रित किया है। उन्होंने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली बार है, जब भारत सरकार की ओर से पाकिस्तान के किसी मंत्री को इस तरह निमंत्रण दिया गया है। भारत सरकार को पाकिस्तान के किसी व्यक्ति या मंत्री को आमंत्रित नहीं करना चाहिए। भारत की अमन पसंद जनता पाकिस्तान के किसी मंत्री के भारत आने का विरोध करेगी।
उन्होंने विदेश मंत्रालय से अपील की कि वह अपने फैसले पर दोबारा विचार करे और पाकिस्तानी मंत्री को भेजा गया निमंत्रण वापस ले। उन्होंने कहा कि पहलगाम में निर्दोष लोगों की हत्या और भारत में हुई अन्य आतंकवादी घटनाओं को देखते हुए पाकिस्तान के मंत्री को दिल्ली में आमंत्रित करना उचित नहीं है। इन घटनाओं में निर्दोष लोगों की जान गई और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस फैसले का खुलकर विरोध करेंगे।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जौहर यूनिवर्सिटी को सरकार के नियंत्रण में लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि आजम खान से जुड़े मामलों और उनकी सजा का मुद्दा अलग है, लेकिन विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्थान है और वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भविष्य को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। विश्वविद्यालय में पढ़ाई सुचारु रूप से जारी रहनी चाहिए और बच्चों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए। विश्वविद्यालय पर बुलडोजर की कार्रवाई करने के बजाय सरकार उसे अपने नियंत्रण में ले और उसके संचालन के लिए एक कमेटी गठित करे।
उन्होंने कहा कि सरकार या सरकार की ओर से नामित कमेटी विश्वविद्यालय का संचालन कर सकती है। इससे आजम खान का हस्तक्षेप समाप्त हो सकता है और संस्थान का कामकाज जारी रह सकता है। विश्वविद्यालय में हजारों बच्चों के भविष्य का सवाल है। यदि पढ़ाई प्रभावित होती है, तो विद्यार्थियों के शैक्षणिक वर्ष, फीस और हॉस्टल की व्यवस्था को लेकर उनके अभिभावकों को परेशानी हो सकती है। इसलिए उन्होंने सरकार से विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने की अपील की।
पाकिस्तान को अमेरिकी समर्थन देने के मुद्दे पर मौलाना ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की टिप्पणी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को दी गई नसीहत उचित है। अमेरिका एक तरफ आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करता है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान को आर्थिक और अन्य सहायता देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर की मदद देकर उसे मजबूती प्रदान करता है, लेकिन भारत में हुई आतंकवादी घटनाओं को लेकर उससे जवाबदेही तय करने की बात नहीं करता।
उन्होंने पहलगाम और पुलवामा की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान को मिलने वाले अमेरिकी समर्थन पर सवाल उठना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए मौलाना ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के अंदर आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के लिए कदम उठाना पड़ा। उन्होंने अमेरिका की नीतियों को लेकर अपनी आलोचना दोहराई और राजनाथ सिंह के बयान के प्रति समर्थन जताया। अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर जाने और पूजा-पाठ करने के मामले पर भी मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि अभिनेत्री ने मंदिर में जाकर पूजा की थी। मौलाना ने धार्मिक मान्यताओं के आधार पर इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यदि उन्होंने ऐसा जानबूझकर किया है, तो उनके अनुसार उन्हें तौबा करनी चाहिए।
--आईएएनएस
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