सावन में बैजनाथ मंदिर का महत्व, सीएम धामी ने की श्रद्धालुओं से दर्शन की अपील
उत्तराखंड, 10 अगस्त (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में गोमती नदी के तट पर स्थित बैजनाथ मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र, बल्कि प्राचीन वास्तुकला और ऐतिहासिक धरोहर का उत्कृष्ट भी माना जाता है। बागेश्वर जिले में पुण्यसलिला गोमती नदी के शांत और सुरम्य तट पर स्थित यह मंदिर कत्यूरी राजवंश की वैभवशाली कलात्मक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
सावन के दूसरे सोमवार के दिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर के बारे में बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो शेयर कर लिखा, "बागेश्वर जनपद की पावन धरती पर स्थित श्री बैजनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित दिव्यता, आस्था और आध्यात्मिक विरासत का अद्भुत संगम है। कत्यूरी शासकों की अद्वितीय स्थापत्य कला से निर्मित यह प्राचीन धाम अपनी भव्य शिल्पकला और आध्यात्मिक महत्ता के लिए विशेष पहचान रखता है।
आइए, सावन के इस पवित्र महीने में बैजनाथ धाम के दर्शन कर देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करें।"
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में गोमती नदी के तट पर स्थित बैजनाथ मंदिर एक प्राचीन शिव मंदिर 1150 ईस्वी के आसपास कत्यूरी राजाओं ने बनवाया था। उस समय इस जगह का नाम कार्तिकेयपुर था जो उनकी राजधानी थी। यहां भगवान शिव वैद्यनाथ रूप में पूजे जाते हैं। यह खूबसूरत स्थल नागर शैली की वास्तुकला और ऐतिहासिक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।
माना जाता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह गोमती और गरुड़ गंगा के संगम के पास हुआ था। महाशिवरात्रि और मकर संक्रांति (उत्तरायणी) के पर्व पर यहां बहुत बड़ा मेला लगता है और भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
यह मंदिर 18 पत्थरों से बने मंदिरों का एक समूह है, जिसमें मुख्य मंदिर भगवान शिव का है, जिसमें माता पार्वती की काली पत्थर पर उकेरी गई बहुत सुंदर और अनूठी मूर्ति स्थापित है। यह उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है, जहां शिव और पार्वती की एक साथ पूजा की जाती है। इस मंदिर परिसर में मुख्य शिव मंदिर के अलावा गणेश, कार्तिकेय, ब्रह्मा, सूर्य, कुबेर, और गरुड़ को समर्पित अन्य छोटे मंदिर भी शामिल हैं।
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