सवाल पूछने पर नहीं मिलनी चाहिए सजा, पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रों ने किया सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत
चंडीगढ़, 31 अगस्त (आईएएनएस)। पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का स्वागत किया है, जिसमें कहा गया है कि सवाल पूछने पर छात्रों को सजा नहीं दी जा सकती। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से इसे लागू करने की मांग की है।
डिपार्टमेंट ऑफ लॉ के तृतीय वर्ष के छात्र रवि कुमार ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की है, उसका खुले दिल से मैं स्वागत करता हूं। सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट पास की है कि छात्रों को डराया धमकाया नहीं जा सकता। जो उनका अधिकार है, इसी के कारण आज हम प्रदर्शन करने बैठे हैं। हमारे मतदान का अधिकार छीना जा रहा है। कम से कम 50 छात्र ऐसे हैं, जिन्हें वोट डालना था, लेकिन गेट बंद कर उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं दिया गया है।"
डिपार्टमेंट ऑफ लॉ के प्रथम वर्ष के छात्र नकुल कौशिक ने कहा, "हमारा अधिकार है कि हम अकाउंटेबिलिटी मांगें। हमें अपने अधिकारों का पता होना चाहिए, उसके लिए जागरूक होना चाहिए।"
एक अन्य छात्र गौरिश कालिया ने बताया, "हम सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से बिल्कुल सहमत हैं। इतिहास में भी यह होता आ रहा है। बच्चों और छात्रों की आवाज को दबाया जाता रहा है। हम चाहते हैं कि इस पर रोक लगे। हम सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से सहमत हैं लेकिन हमारे कॉलेज में इसका कोई बेनिफिट नहीं हुआ। सुबह से हम धक्का-मुक्की कर रहे हैं और अपने हक की बात कर रहे हैं, लेकिन हमें कोई आश्वासन नहीं मिला है।"
उन्होंने कहा, "छात्र शुरू से सवाल पूछता आ रहा है, लेकिन अभी तक इसकी कोई जवाबदेही तय नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अच्छा है, लेकिन वह इसे लागू भी कराएं। पुलिस प्रशासन और कॉलेज प्रशासन जो भी असंवैधानिक कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें भी यह पता होना चाहिए कि जब छात्र अपने हक की बात करें, तो उसके प्रति वह जवाबदेह रहें। लेकिन प्रशासन हमें जवाब ही नहीं देती है। घंटों-घंटों तक बाहर बैठाकर रखते हैं।"
छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। मतदान जैसे बुनियादी अधिकार से वंचित करना गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के पक्ष में जो टिप्पणी की है, वह ऐतिहासिक है और इसे हर शिक्षण संस्थान में लागू किया जाना चाहिए। छात्रों ने मांग की कि यूनिवर्सिटी प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करे और छात्रों को डराने-धमकाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाए।
--आईएएनएस
एससीएच/वीसी
