सत्य निकेतन पीजी विवाद: सौरभ भारद्वाज ने विधायक से मांगे वैधता के दस्तावेज, रजिस्ट्री सार्वजनिक करने की चुनौती
नई दिल्ली, 10 सितंबर (आईएएनएस)। सत्य निकेतन में पीजी हादसे के बाद शुरू हुआ सियासी विवाद अब और तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी ने भाजपा विधायक अनिल शर्मा के पीजी को लेकर कई सवाल उठाए हैं। गुरुवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा विधायक को चुनौती दी कि यदि उनका पीजी और उससे जुड़ा निर्माण वैध है तो वह दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) से पास नक्शा, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और फायर एनओसी सार्वजनिक करें।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि करीब 200 बेड के पीजी के लिए इस्तेमाल की जा रही इमारत का कमर्शियल नक्शा कहां है? उन्होंने सवाल किया कि यदि भवन वैध तरीके से बनाया गया है तो उसके पास एमसीडी से स्वीकृत नक्शा, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और फायर विभाग की एनओसी जरूर होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक पहले अपने किसी पीजी के होने से इनकार कर रहे थे, लेकिन अब रजिस्ट्री दिखाकर जमीन और संपत्ति से जुड़ी जानकारी सामने रख रहे हैं।
भारद्वाज के मुताबिक, इससे यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर संबंधित इमारत और उसमें चल रहे पीजी की वास्तविक स्थिति क्या है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बुधवार को अनिल शर्मा ने प्रेस वार्ता के दौरान रजिस्ट्री दिखाने की बात कही, लेकिन मीडिया को उसकी तस्वीर लेने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि केवल हवा में रजिस्ट्री दिखाने से विवाद खत्म नहीं होगा। विधायक को रजिस्ट्री सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन कितने गज की है, किस स्थान पर है, किसके नाम है और परिवार के कब्जे में मौजूद जमीन के अनुपात में उनके पास कितनी वैध रजिस्ट्री है।
उन्होंने कहा कि अनिल शर्मा दो बार पार्षद रह चुके हैं और अब दूसरी बार विधायक बने हैं। ऐसे में एक सार्वजनिक व्यक्ति होने के नाते उन्हें विवाद की स्थिति में दस्तावेज सामने रखने चाहिए। भारद्वाज ने कहा कि यदि एमसीडी से भवन का नक्शा पास है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, इसके बाद आम आदमी पार्टी भी निर्माण को वैध मान लेगी।
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि अनिल शर्मा ने यह कहा है कि जमीन उनके दादा-परदादा की थी और उन्होंने उसे खुद नहीं खरीदा। इस पर उन्होंने चुनौती दी कि पहले विधायक अपनी रजिस्ट्री सार्वजनिक करें। इसके बाद आप उस क्षेत्र के चूल्हा टैक्स के रिकॉर्ड सामने रखेगी, जिससे यह पता लगाया जा सके कि उनके दादा-परदादा के नाम उस इलाके में कितनी जमीन दर्ज थी। उन्होंने कहा कि यदि जमीन और भवन से जुड़े दस्तावेज सही हैं तो उन्हें सार्वजनिक करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
भारद्वाज ने यह भी कहा कि यदि अनिल शर्मा उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा करना चाहते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि अदालत में दस्तावेजों से जुड़े सवालों का जवाब देना पड़ेगा। पीजी और अवैध निर्माण के लिए दिल्ली की पूर्व आम आदमी पार्टी सरकार को जिम्मेदार ठहराए जाने पर भी सौरभ भारद्वाज ने भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा मंत्री आशीष सूद की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि अवैध निर्माण पिछली सरकार के समय हुए थे। भारद्वाज ने कहा कि एमसीडी कभी अरविंद केजरीवाल सरकार के अधीन नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब 18 से 20 वर्षों में एमसीडी पर भाजपा का नियंत्रण रहा है और अनिल शर्मा खुद एमसीडी में डिप्टी मेयर रह चुके हैं।
भारद्वाज ने भाजपा के वसंत विहार मंडल अध्यक्ष राजेश चौरंगी के सोशल मीडिया अकाउंट का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि चौरंगी के फेसबुक प्रोफाइल पर सत्य निकेतन के एक पीजी का प्रचार करते हुए वीडियो मौजूद है। भारद्वाज के अनुसार, वीडियो में पीजी की सुविधाओं और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं के बारे में लोगों को जानकारी देते हुए छात्रों को आकर्षित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राजेश चौरंगी के फेसबुक प्रोफाइल पर भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी तस्वीरें मौजूद हैं।
सत्य निकेतन पीजी हादसे को लेकर सौरभ भारद्वाज ने छात्रों के वीडियो का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित दूर-दराज के राज्यों से दिल्ली पढ़ाई के लिए आए छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपने वीडियो में पीजी संचालन से जुड़े लोगों और स्थानीय भाजपा नेताओं के बारे में बातें कही हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ वीडियो में भाजपा विधायक अनिल शर्मा और उनके किसी भाई का भी जिक्र किया गया है।
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि हादसे के बारे में मीडिया से बात करने वाले कुछ छात्रों को धमकाया गया। उन्होंने एक छात्रा के वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि इंटरव्यू के दौरान स्थानीय लोगों ने छात्रों की तस्वीरें खींचीं और उन्हें ज्यादा बोलने तथा किसी का नाम नहीं लेने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों के बीच वास्तव में डर का माहौल बनाया गया है तो यह गंभीर मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए।
--आईएएनएस
पीकेटी/डीकेपी
