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सरकार ने इच्छा से नहीं, बल्कि विपक्ष के दखल से एफसीआरए बिल जेपीसी को भेजा: शिवदासन

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) बिल जेपीसी को भेजे जाने पर सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा, "सरकार को इस मामले को संयुक्त संसदीय समिति जेपीसी के पास भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसा सरकार की इच्छा से नहीं, बल्कि विपक्ष के दखल और हमारे संघर्ष की वजह से हुआ।"
 

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) बिल जेपीसी को भेजे जाने पर सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा, "सरकार को इस मामले को संयुक्त संसदीय समिति जेपीसी के पास भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसा सरकार की इच्छा से नहीं, बल्कि विपक्ष के दखल और हमारे संघर्ष की वजह से हुआ।"

उन्होंने कहा कि सरकार इस सत्र में बिल पेश कर उसे पास कराना चाहती थी, लेकिन सत्र के दौरान विपक्षी दलों और राजनीतिक व नागरिक अधिकार समूहों के दखल - जिन्होंने मिलकर बिल और सरकार के रुख का विरोध किया- के कारण इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया।"

भाजपा सांसद सुष्मिता देव की लुंगी वाली टिप्पणी पर शिवदासन ने कहा, "किसी व्यक्ति का पहनावा उसका अपना अधिकार है। हम दक्षिण भारतीय, खासकर केरल के लोग आमतौर पर धोती पहनते हैं। इसलिए धोती पहनना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। अगर कोई हमारे पहनावे के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करता है, तो यह स्वीकार्य नहीं है। हमारे देश की ताकत उसकी विविधता में है। उत्तर भारत में कुछ राज्यों की अपनी अलग संस्कृति है, जबकि पूर्वोत्तर की संस्कृति दक्षिण से अलग है। दक्षिण की संस्कृति पश्चिम से बहुत अलग है। अलग-अलग संस्कृतियां, पहनावा और खानपान की आदतें - ये सभी हमारे देश का हिस्सा हैं। लेकिन भाजपा इसकी अहमियत नहीं समझती है।"

कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक बंद पर शिवदासन ने कहा, "पानी का बंटवारा न केवल दक्षिण में बल्कि हर जगह एक बड़ा मुद्दा है। कुछ बुद्धिजीवियों ने अनुमान लगाया है कि भविष्य में संघर्ष का एक कारण पानी हो सकता है। इसलिए पानी के मुद्दे को बातचीत और आपसी समझ से सुलझाया जाना चाहिए। हवा की तरह पानी भी सभी के लिए है, न कि सिर्फ किसी एक राज्य या व्यक्ति के लिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इसका बंटवारा सही उद्देश्यों के लिए और निष्पक्ष तरीके से हो। यह मेरी राय है। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच बातचीत भी जरूरी है।"

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखते हुए उन्होंने कहा, "झारखंड में छात्रों का विरोध असल में कुछ जायज मुद्दों को लेकर है। साथ ही, हमें बिहार, कोलकाता, महाराष्ट्र और गुजरात में भी ऐसे ही मुद्दों पर चर्चा करने की जरूरत है। झारखंड में, भाजपा इसे विपक्षी दलों के खिलाफ एक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। इसी तरह, उत्तर प्रदेश में भी छात्रों का संघर्ष जायज वजहों से है। उत्तर प्रदेश के तीन-चार मेडिकल कॉलेजों में एससी छात्र राज्य सरकार की आरक्षण नीति का विरोध कर रहे हैं। यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है। उन्हें आरक्षण व्यवस्था के जरिए एडमिशन का उनका अधिकार नहीं दिया गया है। इसलिए उत्तर प्रदेश में यह एक गंभीर मामला है। मुझे उत्तर प्रदेश के छात्रों से पहले ही एक अनुरोध मिल चुका है, इसलिए आज मैं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र भेजूंगा। यह मेडिकल कॉलेजों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है, जहां उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्रों को सही आरक्षण व्यवस्था के तहत एडमिशन देने से मना कर दिया है।"

--आईएएनएस

पीआईएम/वीसी