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सरकार की गलत नीतियों ने हमारे युवाओं को भारी हताशा के दलदल में धकेल दिया : मल्लिकार्जुन खड़गे

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के बाद बुधवार को कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक हुई। बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अपने उद्घाटन संबोधन के कुछ अंश साझा किए।
 

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के बाद बुधवार को कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक हुई। बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अपने उद्घाटन संबोधन के कुछ अंश साझा किए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने बैठक में कहा कि संसद सत्र के समापन के बाद हम लोग पहली बार मिल रहे हैं। कुछ बेहद ज्वलंत मुद्दों पर हमें आपस में चिंतन-मनन करना है। आज हमारी सामूहिक चिंता का सबसे बड़ा बिंदु युवा हैं। आजादी की 80 साल हो गए पर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थितियां बेहतर होने की जगह बदतर होती जा रही हैं। दुनिया का सबसे युवा देश भारत ही है और युवा हमारा भविष्य हैं। सरकार की गलत नीतियों ने हमारे युवाओं को भारी हताशा के दलदल में धकेल दिया है। सांप्रदायिक उन्माद और रेवड़ी कल्चर की होड़ में सबसे अधिक उपेक्षा युवाओं के शिक्षा और रोजगार की हुई है।

बैठक में खड़गे ने कहा कि इस मौके पर मैं राजीव गांधी जी का खासतौर पर स्मरण करना चाहूंगा। गुरुवार को उनकी जन्म जयंती है। उन्होंने प्रचंड बहुमत की सरकार में रहते हुए अपनी नीतियों के केंद्र में नौजवानों को रखा था। राजीव गांधी ने युवाओं को बड़ी भूमिका मिले, इस इरादे से वोटिंग की उम्र 21 साल से घटा कर 18 साल की। देश के हर जिले में नवोदय विद्यालयों का नेटवर्क खड़ा किया। स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने का सिलसिला उसी दौरान आरंभ हुआ। उन्होंने व्यापक विचार-मंथन के बाद जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार कराई, उसमें डिग्री के साथ रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को जोड़ा।

खड़गे ने कहा कि महिलाओं और कमजोर तबकों को इसमें खास जगह मिली। इन बातों को हमारी आगे की सरकारों ने आगे बढ़ाया। यूपीए सरकार में शिक्षा अधिकार से लेकर संस्थाओं के निर्माण और विकास को गति मिली। लेकिन, जब युवाओं पर चर्चा होती है तो हमारे कई साथी, इन बातों को मजबूती से नहीं रखते हैं, जबकि ये हमारी बड़ी उपलब्धियां हैं। इसी के साथ आईटी और संचार क्रांति की भी बड़ी उपलब्धि है, जिसने 21वीं सदी के भारत को शक्ति दी। आजादी के बाद से कांग्रेस के व्यापक प्रयासों की ही देन यह रहा कि देश में सस्ती और सुलभ शिक्षा मिली, जिससे सामाजिक-आर्थिक विकास का रास्ता गरीब और कमजोर तबकों के लिए खुला। लेकिन, पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया है। नए स्कूल खुलने की जगह 94 हजार स्कूल हाल के सालों में बंद हो गए हैं। निजीकरण की होड़ में उच्च शिक्षा लगातार महंगी और आम परिवारों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। शिक्षा संस्थानों में आरएसएस के लोगों का कब्जा होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस हालात में भी जब पढ़-लिखकर युवा नौकरी की तलाश में निकलता है, तो पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में घोटाला और नियुक्तियों में देरी से उसका सामना होता है। इसमें सबसे बुरी हालत गरीब और कमजोर हैसियत वाले बच्चों की होती है। इसीलिए पूरे देश भर में युवाओं में जो रोष उभरा है, वो कोई एक दिन का नहीं है। इस सरकार के पास उनकी बातें सुनने की फुर्सत कभी रही नहीं। सरकार समस्या को टालने के लिए हर बार कोई अस्थायी उपाय खोजती रही। इसलिए उनको सड़क पर उतरने को मजबूर होना पड़ा। कांग्रेस ने उनकी दिक्कतों को अपने एजेंडे में लिया है। राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के माध्यम से उनकी बातों को राष्ट्रीय पटल पर रखा है। संसद मे भी हम सबने प्रयास किया कि शिक्षा और परीक्षा के सवाल पर व्यापक मंथन हो। छात्रों पर हुई ज्यादती पर चर्चा हो, जवाबदेही तय हो। पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री पूरे मानसून सत्र में सवालों से बचते रहे। अब वे बोलने लगे हैं पर युवाओं के सवालों की जगह गैर मुद्दों को ही तूल दे रहे हैं। समय आ गया है कि भविष्य की तैयारी के लिहाज से कांग्रेस युवाओं के लिए एक स्पष्ट, व्यापक और समयबद्ध शिक्षा से रोजगार तक का रोडमैप तैयार करे।

खड़गे ने कहा कि इसी तरह आम लोगों के भरोसे से जुड़ा दूसरा अहम सवाल राम मंदिर है। राम मंदिर में हुए भारी घोटाले का मुद्दा जन-जन के बीच गूंज रहा है। राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री ने संसद में ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी। सोच-विचार कर उन्होंने अपने लोगों को ट्रस्ट में रखा होगा। आम लोगों ने यह सोचकर इसमें दिल खोलकर चंदा, सोना-चांदी दिया कि ट्रस्ट प्रधानमंत्री ने बनाया है, इसीलिए ईमानदारी से काम होगा। लेकिन वहां पर भारी घोटाला सामने आया है। लोग सवाल पूछ रहे हैं पर प्रधानमंत्री लगातार मौन हैं। देश जानना चाहता है कि वहां कितना चढ़ावा आया, कितना सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य सामग्री आई? उसका लेखा-जोखा क्या है? केवल चंद छोटे लोगों को जेल भेजने भर से ये मामला समाप्त नहीं होगा। इस मुद्दे को भाजपा जितना डायवर्ट करेगी, लोगों के मन में संदेह उतना ही गहरा होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों चीन द्वारा हमारी सीमा में अतिक्रमण से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए हैं। सरकार को इस पर ईमानदारी से बात रखनी चाहिए थी, पर आदत के मुताबिक सरकार ने सूत्रों के पीछे छिपते हुए इन खबरों को गलत बताया है। हमारा स्पष्ट मत है - राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। पर राष्ट्रीय सुरक्षा की किसी भी स्तर पर अनदेखी भी नहीं होनी चाहिए। हमारी देश की सीमाओं की वास्तविक हकीकत क्या है, ये देश के नागरिकों को जानने का अधिकार है। 2020 के गलवान झड़प के बाद देश ने प्रधानमंत्री का वो बयान सुना था कि 'न कोई घुस आया है और न कोई घुसा हुआ है।' छह वर्ष बाद भी सीमा से जुड़े गंभीर सवाल उठ रहे हैं पर सरकार स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही।

खड़गे ने कहा कि सेना बखूबी अपना काम कर रही है। हम जवानों के जज्बे और जोश को सलाम करते हैं। हमारा सवाल सरकार से है। लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही हमें सुनिश्चित करनी है। युवाओं का भविष्य, जनता की आस्था और देश की सीमाएं- इन तीनों के केंद्र में एक ही सवाल है: क्या यह सरकार जनता के भरोसे के लायक है?

वहीं, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि इस देश में बच्चे समझ गए हैं कि कौन पढ़ा-लिखा नेता है और कौन अनपढ़ नेता है। भाजपा वालों से राष्ट्रभक्ति सीखने की जरूरत नहीं है। अब उन लोगों से क्या ही राष्ट्रभक्ति सीखी जाए, जो कहते हैं कि हमें आजादी 2014 के बाद मिली। जेनजी की बात तो छोड़िए, जेन-अल्फा सड़क पर निकल रहे हैं। प्रधानमंत्री इस बात को अच्छी तरह से समझ गए हैं, इसीलिए आराम करने के बजाय 1:30 बजे रात में वीडियो बना रहे हैं। अगर भाजपा की 50 और सीट आ गई होती तो उन्होंने देश का संविधान बदल दिया होता। इन्होंने सिर्फ दूसरी पार्टियों को तोड़ने का काम किया। इनके पास इनका अपना कोई नहीं है।

--आईएएनएस

एमएस/एबीएम