सर्दियों में थोड़ा सा चलने पर फूल जाती है सांस, ये छोटा सा संकेत बड़ी बीमारियों की निशानी
नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। आज की जीवनशैली में सीढ़ियों की जगह लिफ्ट और पार्क की जगह जिम ने ले ली है। अगर थोड़ा दूर चलना हो तो कई विकल्प उपलब्ध होते हैं। कम चलने की आदत कई बार परेशान करती है और थोड़ा सा चलने या सीढ़ियों पर चढ़ने पर ही सांस फूलने लगती है।
सांस फूलना सिर्फ कमजोरी का लक्षण नहीं है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का संकेत है। सर्दियों में सांस फूलने की परेशानी सबसे ज्यादा होती है।
सर्दियों में दिल, फेफड़ों या रक्त में ऑक्सीजन की कमी होती है। वातावरण में मौजूद ठंडी हवा फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं को सिकुड़ने का काम करती है, जिससे चलते-चलते गले में रूखापन, हांफना और थकान महसूस होने लगती है, लेकिन ये कमजोर दिल, फेफड़ों की कमजोरी और थायरॉयड का असंतुलन दिखाता है। कभी-कभी ये लक्षण खून की कमी की तरफ भी इशारा करते हैं। अगर आप भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं तो आयुर्वेद में उसके उपाय भी बताए गए हैं।
सर्दियों में तुलसी और लौंग का काढ़ा का सेवन करने से आराम मिलेगा। सुबह के समय तुलसी, अदरक और लौंग का काढ़ा बनाकर लिया जाए तो फेफड़ों की सिकुड़न कम होती है और ऑक्सीजन का प्रवाह तेज होता है, जिससे फेफड़े सही तरीके से काम करना शुरू कर देते हैं।
इसके अलावा, रात में भिगोई मेथी सुबह गुड़ के साथ लेने से भी फायदा मिलता है। ये मिश्रण फेफड़ों को मजबूती प्रदान करता है और सर्द हवा भी फेफड़ों को नुकसान नहीं पहुंचा पाती।
भारी और तला-भूना, मसालेदार खाना भी डायाफ्राम और फेफड़ों पर नकारात्मक असर डालती है। तला-भूना खाने से पेट और डायाफ्राम पर असर पड़ता है और डायाफ्राम फेफडों को संकुचित करने का काम करता है। इसलिए सात्विक भोजन और कम मसालेदार भोजन करना चाहिए। इसके अलावा शहद और अदरक के रस का सेवन भी किया जा सकता है। इससे कफ कम होगा और सांस लेने में परेशानी कम होगी।
फेफड़ों को मजबूत बनाने और हार्मोन को संतुलित करने के लिए रोजाना नियमित रूप से प्राणायाम करना भी जरूरी है। रोजाना सुबह अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और डीप ब्रीदिंग का अभ्यास करें। इससे शरीर में ऑक्सीजन लेवल बढ़ाता है, श्वसन नलिकाएं शांत रहती है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। साथ ही कोशिश करें कि पूरे दिन गुनगुना पानी पीएं। इससे फेफड़ों में होना वाला संक्रमण कम होता है।
--आईएएनएस
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