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यूपी के बंटवारे के पक्ष में नहीं, मजबूत प्रशासन से ही होगा विकास : पूर्व सांसद धनंजय सिंह

जौनपुर, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने शनिवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर ‘जन एकता यात्रा’ का नेतृत्व करते हुए युवाओं से राष्ट्रवादी, शक्तिशाली बनने और योग-व्यायाम व ज्ञान अर्जित करने का आह्वान किया। आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत की 40 करोड़ युवा आबादी अत्यंत संभावनाशील है, जिसे सही दिशा और चरित्र निर्माण की जरूरत है, इसी उद्देश्य से राष्ट्रवादी नौजवान सभा 10 से 25 हजार राष्ट्र-समर्पित युवाओं का समूह तैयार करेगी।
 

जौनपुर, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने शनिवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर ‘जन एकता यात्रा’ का नेतृत्व करते हुए युवाओं से राष्ट्रवादी, शक्तिशाली बनने और योग-व्यायाम व ज्ञान अर्जित करने का आह्वान किया। आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत की 40 करोड़ युवा आबादी अत्यंत संभावनाशील है, जिसे सही दिशा और चरित्र निर्माण की जरूरत है, इसी उद्देश्य से राष्ट्रवादी नौजवान सभा 10 से 25 हजार राष्ट्र-समर्पित युवाओं का समूह तैयार करेगी।

पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, युवा राष्ट्रवादी बनें, युवा शक्तिशाली बनें, ताकतवर बनें, व्यायाम करें, योग करें और ज्ञान अर्जित करें। सबसे बड़ी जो आज हमारे सामने चुनौती है, वह यह है कि भारत एक युवा देश है। लगभग 40 करोड़ की युवा आबादी हमारे पास है। यह युवा शक्ति अत्यंत संभावनाशील है। इसे सही दिशा की आवश्यकता है, ताकि उनका चरित्र निर्माण हो।

उन्होंने कहा कि चरित्र निर्माण को केवल एक परिप्रेक्ष्य में नहीं देखना चाहिए। उनका ऐसा निर्माण हो कि वे समाज और राष्ट्र में अपनी भूमिका किस प्रकार निभाएं, इस बारे में उनके अंदर सोच विकसित हो। इसी उद्देश्य के साथ राष्ट्रवादी नौजवान सभा की स्थापना हुई है। नौजवानों का एक प्रयास होगा कि 10, 20 या 25 हजार युवाओं का ऐसा समूह तैयार हो, जो राष्ट्र के लिए समर्पित हो, राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत हो और समाज तथा राष्ट्र के उत्थान के लिए कार्य करे।

जातीय समीकरणों और जातीय मुद्दों पर राजनीति को लेकर पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने कहा कि हर चीज का एक समय होता है। एक समय था जब कई दशकों तक इसी प्रकार की राजनीति चली, लेकिन अब वह राजनीति समाप्त हो रही है। मैं एक बात कह रहा था कि जब कांग्रेस आई और बनी, तभी उसके पतन की शुरुआत भी हो गई थी। धीरे-धीरे उसका प्रभाव कम होता गया। 2019 तक कांग्रेस की क्या स्थिति थी, यह सभी ने देखा। लेकिन अब परिवार से थोड़ा बाहर निकलकर कांग्रेस आगे बढ़ी है, तो उसमें कुछ सुधार दिखाई दिया है।

उन्होंने कहा कि मैं हमेशा कहता हूं कि राष्ट्रीय दल देशहित में बने रहेंगे, क्योंकि उनका राष्ट्रीय चिंतन होता है। मैं पहले भी कहता रहा हूं कि राष्ट्रीय स्तर पर केवल दो प्रमुख दलों को चुनाव लड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहले गठबंधन हो जाएं, उसके बाद चुनाव आयोग को हस्तक्षेप करना चाहिए। जब ईआर (निर्वाचक नामावली) की मांग चल रही है, तब मतदाता सूची की त्रुटियों को दूर करना आवश्यक है। लेकिन मैं बार-बार चुनाव आयोग से मांग करता हूं कि चुनाव पूर्व गठबंधन तय कर दिए जाएं और एक ही चुनाव चिह्न पर चुनाव कराया जाए, ताकि जनता को स्पष्ट विकल्प मिल सके।

पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने कहा कि चुनाव ऐसा हो कि गठबंधन अंतिम समय तक साथ रहे। ऐसा न हो कि बहुमत मिलने के बाद कुछ लोग दूसरी तरफ चले जाएं। जिस विचारधारा के साथ लोग चुनकर आए हैं, वे कार्यकाल पूरा होने तक उसी विचारधारा के साथ बने रहें। इस प्रकार का कोई प्रावधान होना चाहिए। बार-बार चुनाव होने से देश पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और विकास कार्य प्रभावित होते हैं। इसी वजह से 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की जो बात चल रही है, यदि वह लागू हो जाए तो बहुत अच्छा होगा।

रोजगार से जुड़े यूपी सरकार के नए फरमान को लेकर उन्होंने कहा कि जहां तक नए नियमों का सवाल है, मैंने अभी उन्हें विस्तार से नहीं पढ़ा है। इसलिए इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। यदि कोई कानून संसद या विधानसभा से पारित हुआ है, कोई कैबिनेट नोट पारित हुआ है या कोई सरकारी आदेश जारी हुआ है, तो उसके अध्ययन के बाद ही उस पर टिप्पणी की जा सकती है।

पूर्व सांसद ने कहा कि छात्र जीवन में छात्रों को देखकर कभी ऐसा नहीं लगा कि कोई एससी है, कोई ओबीसी है, कोई हिंदू है या कोई मुस्लिम है। हम सब साथ पढ़े, साथ बढ़े और कभी इस प्रकार का भेदभाव हमारे मन में नहीं आया। इसलिए 21वीं सदी में इस प्रकार की बातें होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कई स्थानों पर इसे लागू भी कर दिया गया था, लेकिन इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। मामला न्यायपालिका के समक्ष लंबित है, इसलिए उस पर निर्णय आने की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार वही कार्य करती है और वही करना भी चाहिए जिसकी जनता मांग करती है। जब राज्यों के बंटवारे की मांग उठती है, आंदोलन होते हैं, तब इस प्रकार के निर्णय लिए जाते हैं। उत्तराखंड उत्तर प्रदेश से अलग हुआ तो उसके पीछे लंबा आंदोलन और जनभावना थी। पहले हरित प्रदेश की मांग भी होती थी, आंदोलन भी होते थे, लेकिन अब वह आवाज लगभग शांत हो गई है। आज उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग प्रमुखता से नहीं उठती और हम भी इसके पक्ष में नहीं हैं।

धनंजय सिंह ने कहा कि बंटवारा कर देना ही विकास का मॉडल नहीं होता। जिले विकास और प्रशासनिक सुविधा के लिए बनाए जाते हैं। राज्यों का लगातार विभाजन करके विकास का मॉडल तैयार नहीं किया जा सकता। यदि प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत हो, तो बिना बंटवारे के भी विकास संभव है।

--आईएएनएस

केके/वीसी