'जनता ने सिर्फ बयानबाजी और पोस्टरबाजी के लिए छोड़ा', सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर बरसे संजय निषाद
प्रयागराज, 23 सितंबर (आईएएनएस)। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया है।
प्रयागराज में मीडिया से बात करते हुए संजय निषाद ने आरोप लगाया कि सपा कार्यकाल में एससी-एसटी एक्ट बेअसर था और निचले पायदान पर खड़े समाज को विकास की मुख्यधारा से काटकर गरीबों को सड़ा अनाज देकर आधी कीमत वसूली गई।
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मंत्री डॉ. संजय निषाद ने सपा प्रमुख की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा, "वो नेता और पार्टी अध्यक्ष हैं, अगर वो खुद संविधान को मानते, तो अंबेडकर की मूर्ति नहीं तोड़ते, नाम नहीं बदलते। उन्होंने रिजर्वेशन के तहत प्रमोशन लिस्ट रद्द नहीं की होती। अगर वो संविधान को मानते, तो समाज में निचले पायदान पर रहने वालों को विकास की धारा में लाने का काम करते।"
संजय निषाद ने कहा कि उनके कार्यकाल में एससी-एसटी एक्ट बेअसर था। अगर उन्हें सच में संविधान पर भरोसा होता, तो वे समाज के सबसे निचले तबके के लोगों को विकास की मुख्यधारा में लाने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए काम करते।
उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें केवल बयानबाजी और पोस्टरबाजी के लिए छोड़ रखा है। निचले पायदान पर रहने वाले गरीब भूखे मर रहे थे, अनाज सड़ रहा था, ये लोग सड़ा अनाज देकर उनसे आधी कीमत लेते थे। हमारी सरकार समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों के लिए काम कर रही है, उनके खाने के लिए अनाज, इलाज की व्यवस्था और रहने के लिए मकान दे रही है।
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए संजय निषाद ने कहा कि सलाहकार शकुनी मामा थे, जिस वजह से कौरव हार गए। सलाहकार कैसे हैं, जिसमें न सरकार और न संत शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जो अवैध है, वो अवैध है। निषाद राज के किले में 2013 में एक भी मस्जिद नहीं थी, लेकिन अब किले में मस्जिद बन गई है। खुदाई हुई, मस्जिद नहीं मिली। इस्लाम में लिखा गया है कि विवादित जगह पर सजदा करना गुनाह है, तो ऐसी जगह पर क्यों इबादत करना? अवैध रहेगा तो बुलडोजर चलेगा। वो एक उन्मादी नेता हैं, विवादित बयान देकर उन्माद खड़ा नहीं करेंगे तो और क्या होगा?
--आईएएनएस
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