Aapka Rajasthan

सपा-कांग्रेस की दाल नहीं गलेगी, 2027 में फिर एनडीए सरकार : दिनेश प्रताप सिंह

लखनऊ, 26 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा नेता दिनेश प्रताप सिंह ने दावा किया कि एक बार फिर एनडीए की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आएगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस चाहे जितनी कोशिश कर लें, उत्तर प्रदेश में उनका गठबंधन सफल नहीं होगा।
 

लखनऊ, 26 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा नेता दिनेश प्रताप सिंह ने दावा किया कि एक बार फिर एनडीए की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आएगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस चाहे जितनी कोशिश कर लें, उत्तर प्रदेश में उनका गठबंधन सफल नहीं होगा।

उन्होंने लखनऊ में आईएएनएस से बातचीत के दौरान सपा नेता शिवपाल यादव के कांग्रेस को लेकर दिए गए बयान पर तंज कसा।

उन्होंने कहा कि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और सपा तथा कांग्रेस के नेताओं के बयान उनके गठबंधन की स्थिति को स्पष्ट करते हैं।

भाजपा नेता ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस को जनता का समर्थन नहीं मिलेगा। दोनों दलों को उम्मीद थी कि गठबंधन के जरिए वे भाजपा को चुनाव में हरा देंगे, लेकिन अब वे आपस में ही मतभेदों में उलझे हुए हैं। यदि दोनों दल एक-दूसरे का साथ नहीं देंगे तो उत्तर प्रदेश में उनके लिए चुनावी चुनौती और बढ़ जाएगी।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गठबंधन अब 'लठबंधन' जैसा दिखाई दे रहा है। एक दल सीटों की बात करता है तो दूसरा सीट देने से इनकार करता है। उत्तर प्रदेश की जनता ने तय कर लिया है कि सपा-कांग्रेस की दाल नहीं गलेगी और 2027 में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनेगी।

भाजपा नेता ने शिवपाल यादव के एक अन्य बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बयान से वर्ष 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की याद आती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रदेश में भाजपा की सरकार है और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। आप फिर से जंगलराज लाने की बात कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जंगलराज नहीं, योगी राज है और योगी राज ही चलेगा।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयान का जिक्र करते हुए दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि लगातार चुनावों में मिली हार के बाद वे हताश हो चुके हैं। जब कांग्रेस किसी राज्य में चुनाव जीतती है तो आयोग और ईवीएम को लेकर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन चुनाव हारने के बाद चुनाव आयोग, एसआईआर, ईवीएम और काउंटिंग एजेंटों को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। राहुल गांधी को संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले तथ्य और सबूत सामने रखने चाहिए। बिना तथ्य के आरोप लगाना उचित नहीं है। जनता राहुल गांधी की राजनीति को समझ चुकी है और उन्हें सत्ता पाने का ख्वाब वर्ष 2047 के बाद का देखना चाहिए, क्योंकि उससे पहले सत्ता में लौटने का अवसर नहीं मिलेगा।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम