संतों ने अयोध्या में राम मंदिर के आसपास नॉन-वेज खाने की डिलीवरी पर प्रतिबंध का स्वागत किया
अयोध्या, 10 जनवरी (आईएएनएस)। अयोध्या में राम मंदिर के आसपास 15 किलोमीटर के दायरे में नॉन-वेज खाने की डिलीवरी पर प्रतिबंध के बाद साधु-संतों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस कदम को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि नॉन-वेज खाने की डिलीवरी पर प्रतिबंध का फैसला स्वागतयोग्य है। हम लंबे समय से यह मांग उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, "अयोध्या नगरी में कई जगह मांस बिक्री होती थी, जिससे पर रोक लगाई गई है। भगवान राम के पवित्र शहर में 'दर्शन-पूजन' करने आने वाले भक्तों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।"
देवेशाचार्य महाराज ने इसे सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा, "यह बहुत संतोष की बात है कि अयोध्या में अब नॉन-वेज खाने की बिक्री और डिलीवरी पर बैन लगा दिया गया है। यह हमारी कई सालों से मांग थी। अयोध्या भगवान राम की नगरी है और आध्यात्मिकता का केंद्र है, जहां दुनिया भर से भक्त आते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "ऐसी परिस्थितियों में, जब नॉन-वेज खाना परोसा जाता है, तो यह हमारी संस्कृति और गरिमा के खिलाफ जाता है। श्रद्धालुओं के भक्ति भाव को देखते हुए जो निर्णय हुआ है, मैं इस कदम का स्वागत करता हूं और उम्मीद करता हूं कि इसे सख्ती से लागू किया जाएगा।"
नासिक के महंत भक्ति चरणदास जी महाराज ने कहा, "मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल से धन्यवाद करता हूं। पंचकोसी और चौदह कोसी परिक्रमा मार्गों समेत पूरे अयोध्या में नॉन-वेज खाने पर बैन से पता चलता है कि अयोध्या दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी बन रही है। अयोध्या क्षेत्र में नॉन-वेज पर बैन लगाकर सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है और पूरे भारत के संत समाज की ओर से मैं मुख्यमंत्री और उनके सभी अधिकारियों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं।"
अयोध्या प्रशासन ने शुक्रवार को राम मंदिर के 15 किलोमीटर के दायरे में नॉन-वेज खाने की डिलीवरी पर बैन लगाया है। अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला बार-बार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया। अधिकारियों ने यह भी बताया कि अयोध्या में कुछ होटल और होमस्टे मेहमानों को नॉन-वेज खाना और शराब परोस रहे थे। इन जगहों को ऐसी प्रथाओं को बंद करने की सख्त चेतावनी दी गई है।
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