संत गुरु रविदास जी के 650वें प्रकट उत्सव के अवसर पर देशव्यापी 'समरसता संकल्प अभियान' चलाएगी भाजपा
नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ और दुष्यंत कुमार गौतम ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया और संत गुरु रविदास जी के 650वें प्रकट उत्सव के उपलक्ष्य में 29 जुलाई 2026 से 20 फरवरी 2027 तक देशव्यापी 'संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महाराज समरसता संकल्प अभियान' चलाने की घोषणा की।
दुष्यंत कुमार गौतम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संत गुरु रविदास जी से जुड़े स्थलों के विकास और उनके सम्मान के लिए की गई पहलों का भी उल्लेख किया। तरुण चुघ ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य संत गुरु रविदास जी के समरसता, सामाजिक समानता और जनजागरण के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाना है।
दुष्यंत कुमार गौतम ने कहा कि आज की यह प्रेस वार्ता संत गुरु रविदास जी के 650वें प्रकट उत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित की गई है, जो 20 फरवरी 2027 को मनाया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी निरंतर उन सभी महापुरुषों का सम्मान करती है, जिन्होंने धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक अथवा अन्य किसी भी क्षेत्र में देश की संस्कृति और संस्कारों को समृद्ध बनाने में योगदान दिया है। ऐसे सभी महापुरुष पार्टी के आराध्य हैं। इसी क्रम में पूर्व में अहिल्याबाई होलकर जी सहित अन्य महापुरुषों की जयंती भी मनाई गई है। उसी श्रृंखला में आज संत गुरु रविदास जी के 650वें वर्ष का शुभारंभ किया जा रहा है। यह गौरव का विषय है कि संत गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी के सीर गोवर्धन ग्राम में हुआ था, तथा वे चित्तौड़गढ़ के किले के भीतर, जहां मीरा जी का मंदिर स्थित है, वहीं ब्रह्मलीन हुए थे।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि संत गुरु रविदास जी का संपूर्ण जीवन उस कालखंड में बीता, जब सिकंदर लोदी, तुगलक और तैमूर जैसे शासक पूरे देश में धर्म परिवर्तन कराने और मंदिरों को तोड़ने का कार्य कर रहे थे। उस समय उनका एक ही नारा था, 'तलवार या कुरान।' मध्यकाल के उस दौर में लोगों के सामने अपने विचार रखने का कोई मार्ग नहीं था और चारों ओर हाहाकार की स्थिति थी। ऐसे समय में भक्ति काल के अनेक महापुरुषों, जिनमें गोस्वामी तुलसीदास जी, कबीरदास जी, संत तुकाराम जी, गुरु नानक जी और चैतन्य महाप्रभु प्रमुख थे, ने संस्कृत में निहित ज्ञान और संस्कारों को अपनी-अपनी प्रादेशिक भाषाओं के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाकर पूरे देश में जनजागरण और समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। उस कालखंड में संत गुरु रविदास जी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इसी कारण कबीर जी ने उन्हें 'संत शिरोमणि गुरु रविदास जी' की उपाधि दी थी।
गौतम ने कहा कि संत गुरु रविदास जी ने उस समय समाज को यह मार्ग दिखाया था कि 'सच्चा मत छोड़ कर मैं क्यों पढ़ूं कुरान, वेद धर्म त्यागूं नहीं जो गले चले कटार।' अर्थात उन्होंने मृत्यु स्वीकार करना उचित समझा, लेकिन धर्म परिवर्तन स्वीकार नहीं किया। संत गुरु रविदास जी के अनेक उद्बोधन आज भी समाज को प्रेरणा देते हैं, जिनमें 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' विशेष रूप से प्रसिद्ध है। उनका कहना था कि यदि मन पवित्र है तो वही सबसे बड़ा तीर्थ है। संत गुरु रविदास जी कर्मयोगी थे। वे कर्म करते हुए, जूती गांठते हुए भी निरंतर प्रभु श्रीराम का स्मरण करते रहते थे। संत गुरु रविदास जी चमड़ा भिगोने के लिए जिस कठौती का उपयोग करते थे, उसी के संबंध में यह मान्यता है कि उसमें भी मां गंगा प्रकट हुई थीं। एक प्रसंग के अनुसार जब राजा को रानी के लिए कंगन चाहिए था, तब संत गुरु रविदास जी ने उसी कठौती से माता गंगा का कंगन निकालकर उन्हें दिया था। उस कालखंड में संत गुरु रविदास जी ने समाज को यह संदेश दिया कि "ऐसा चाहूं राज में मिले सभी को अन्न, छोटे बड़े संग बसे रविदास रहे प्रसन्न।"
दुष्यंत कुमार गौतम ने कहा कि आज से लगभग साढ़े छह सौ वर्ष पूर्व संत गुरु रविदास जी ने जिस समतामूलक समाज की कल्पना की थी, वह अपने समय से बहुत आगे की सोच थी। अब्राहम लिंकन ने वर्ष 1837 में दास प्रथा से मुक्ति के लिए आंदोलन चलाया और बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी ने संविधान लिखते समय समता, स्वतंत्रता और बंधुता के सिद्धांत दिए, जबकि संत गुरु रविदास जी ने उससे बहुत पहले ही 'छोटे-बड़े सब बसे' का संदेश देकर जातिविहीन समाज और 'बेगमपुर' की कल्पना प्रस्तुत की थी, जहां न कोई गम हो और न कोई तकलीफ। यही कारण था कि उस समय संत गुरु रविदास जी के शिष्य केवल अनुसूचित जाति वर्ग तक सीमित नहीं थे। उन्होंने जाति से ऊपर उठकर समाज को जोड़ने का कार्य किया। उनके शिष्यों में मीराबाई, रानी झालीबाई तथा मेवाड़ के 46 राजा भी शामिल थे। गुरु नानक जी उनके समकालीन और सहयोगी रहे तथा प्रातः स्मरणीय गुरु ग्रंथ साहिब में भी संत गुरु रविदास जी द्वारा रचित 41 पद संकलित हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि संत गुरु रविदास जी के 650वें प्रकट उत्सव के उपलक्ष्य में उनके जन्मदिवस तक पूरे वर्ष विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रत्येक जन्मोत्सव पर संत गुरु रविदास जी को श्रद्धापूर्वक नमन किया है तथा उनके जीवन और विचारों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए अनेक पहल की हैं। आदमपुर एयरपोर्ट का नाम संत गुरु रविदास एयरपोर्ट रखा गया, जालंधर से उनकी जन्मस्थली तक ट्रेन का नामकरण किया गया तथा जालंधर के परम संत निरंजन दास जी को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वर्ष 2012 से अब तक काशी स्थित संत गुरु रविदास जी की जन्मस्थली का भव्य निर्माण कराया गया है। मध्य प्रदेश के सागर में उनके नाम पर एक शोध केंद्र बनाया जा रहा है। वहां उनके समकालीन उन संतों के चित्र भी स्थापित किए गए हैं, जिन्होंने समरसता का भाव जगाया था, तथा "मन चंगा तो कठौती में गंगा" की भावना पर आधारित एक सागर का भी निर्माण किया गया है।
गौतम ने कहा कि दिल्ली के तुगलकाबाद स्थित मंदिर, जो उस समय की तत्कालीन सरकार द्वारा उचित पैरवी न किए जाने के कारण टूट गया था, उसके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी चल रही है और शीघ्र ही उसका भूमि पूजन किया जाएगा। पंजाब के खुरालगढ़ स्थित मंदिर का निर्माण उनकी सरकार ने 100 करोड़ रुपए की लागत से कराया है। इसी प्रकार कुरुक्षेत्र में भी आने वाले एक से डेढ़ वर्ष में संत गुरु रविदास जी का एक भव्य मंदिर और उनकी विशाल प्रतिमा दिखाई देगी। गुजरात के जूनागढ़, काशी की जन्मभूमि, चित्तौड़गढ़, बनारस तथा संत गुरु रविदास जी के जीवन और उनसे जुड़े अन्य सभी प्रमुख स्थलों का भी जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रारंभ हो चुका है और कल से इसका विस्तृत आयोजन शुरू होगा।
तरुण चुघ ने कहा कि भाजपा ने संत गुरु रविदास जी के 650वें जयंती वर्ष को 'समरसता संकल्प अभियान' के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह राष्ट्रीय अभियान पवित्र गुरु पूर्णिमा, 29 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर 20 फरवरी 2027, अर्थात संत गुरु रविदास जी की जयंती तक, लगभग सात माह तक 'संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महाराज समरसता संकल्प अभियान' के नाम से चलाया जाएगा। 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में सबसे पहले 28 जुलाई को वाराणसी स्थित संत गुरु रविदास जी के जन्मस्थान पर उनकी जन्मस्थली की मिट्टी से भरे 131 कलशों का पूजन किया जाएगा। इसके बाद शोभायात्रा निकाली जाएगी। 29 जुलाई को जन्मस्थली की पूजित मिट्टी से भरे इन 131 कलशों को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी तथा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में पूरे देश के लिए रवाना किया जाएगा।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि 29 जुलाई को संत गुरु रविदास जी की जन्मस्थली की पावन मिट्टी से भरे कलशों की यात्रा पूरे देश के सभी राज्यों के लिए रवाना होगी। इसके बाद यह यात्रा सभी राज्यों से होते हुए देश के प्रत्येक जिले तक पहुंचेगी। देशभर के 21,000 स्थानों पर कलश वंदन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 29 जुलाई से 10 सितंबर तक ये कलश 21,000 स्थानों पर पहुंचेंगे। देश के प्रत्येक गांव, मोहल्ले, बस्ती, मंडल और शहर में कलश यात्रा निकाली जाएगी तथा कलश की आरती और पूजा की जाएगी। यह वही पावन मिट्टी है, जिसने धर्म परिवर्तन के विरुद्ध आवाज उठाने वाले संत गुरु रविदास जी को जन्म दिया। संत गुरु रविदास जी ने भक्ति काल में सामाजिक समरसता का संदेश दिया और भक्ति आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। संत गुरु रविदास जी की शिष्या मीराबाई ने भी पूरे देश में जनजागरण का कार्य किया। ऐसे महान संत गुरु रविदास जी की जन्मस्थली की पावन मिट्टी से भरे कलश 21,000 स्थानों तक पहुंचेंगे। लगभग 10 सितंबर तक यह पावन मिट्टी देश के हर गांव, हर बस्ती, हर मोहल्ले, हर मंडल, हर शहर और भारत के प्रत्येक कोने तक पहुंचाई जाएगी।
चुघ ने कहा कि 29 जुलाई से इस अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है, इसलिए देशभर में श्रद्धालु गुरु पूर्णिमा के कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इसी अवसर पर 29 जुलाई की मध्यरात्रि को देश के 51,000 मंदिरों तथा विभिन्न समाजों के मंदिरों में संत गुरु रविदास जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। 51,000 स्थानों पर दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा। साथ ही वाराणसी के गंगा घाट पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की उपस्थिति में ऐतिहासिक दीपमाला का आयोजन भी किया जाएगा। यह अभियान पूरे वर्ष चलेगा। इसके अंतर्गत 29 जुलाई से 15 जनवरी तक देशभर के संतों के साथ व्यापक संपर्क अभियान भी चलाया जाएगा। कुछ लोग आज भी विदेशी टूलकिट का हिस्सा बनकर भारत में समाज को विभाजित करने का कार्य कर रहे हैं, जबकि संत गुरु रविदास जी का संदेश समाज को जागृत करने, एकजुट करने और समरस बनाने का है। इसी उद्देश्य से भाजपा के कार्यकर्ता और नेता देशभर के संतों से संपर्क करेंगे तथा संत गुरु रविदास जी की शिक्षाओं, 'बेगमपुरा' की अवधारणा और उनके आदर्शों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाएंगे। इस अभियान के अंतर्गत देशभर के संतों, कथाकारों, कीर्तनकारों और भजन मंडलियों के साथ भी व्यापक संपर्क स्थापित किया जाएगा।
तरुण चुघ ने कहा कि इसके बाद एक बड़ी यात्रा जालंधर से प्रारंभ होगी, जो पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश होते हुए संत गुरु रविदास जी की जन्मस्थली पर जाकर संपन्न होगी। इसी प्रकार देश के अन्य राज्यों में भी उप-यात्राएं निकाली जाएंगी, जो मुख्य यात्रा में सम्मिलित होंगी। यह यात्रा 5 अक्टूबर से 5 नवंबर तक, लगभग एक माह तक चलेगी। इस अभियान के अंतर्गत देशभर के छात्रावासों, मंदिरों, विद्यार्थियों और विद्यालयों के साथ विशेष संपर्क एवं कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संत गुरु रविदास जी के जीवन से जुड़े पांच प्रमुख स्थलों - जूनागढ़ (गुजरात), सागर (मध्य प्रदेश), चित्तौड़गढ़ (राजस्थान), खुरालगढ़ साहिब (पंजाब) और श्री गुरु रविदास मंदिर (दिल्ली) के भव्य विकास के लिए भाजपा के कार्यकर्ता स्थानीय सरकारों के साथ समन्वय कर कार्य करेंगे।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि संत गुरु रविदास जी के 650वें जयंती वर्ष के अवसर पर सात माह तक चलने वाले इस अभियान के अंतर्गत 21,000 पवित्र कलशों का पूजन तथा 187 प्रतिनिधियों के सहयोग से चार चरणों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पहले चरण में वाराणसी स्थित संत गुरु रविदास जी की जन्मस्थली की पावन मिट्टी को देश के गांव-गांव के मंदिरों तक पहुंचाया जाएगा। दूसरे चरण में देशभर के संतों से संपर्क कर समरसता का संदेश प्रसारित किया जाएगा। तीसरे चरण में देश के युवाओं से संपर्क कर संत गुरु रविदास जी के उस सिद्धांत को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा, जिस पर यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार कार्य कर रही है। चौथे चरण में देश के प्रत्येक गांव से यात्रा निकालकर श्रद्धालुओं को संत गुरु रविदास जी की जन्मस्थली तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
चुघ ने कहा कि संत गुरु रविदास जी की 650वें जयंती वर्ष के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं इस अभियान की शुरुआत की। इस वर्ष देसी पंचांग के अनुसार संत गुरु रविदास जी की जयंती 1 फरवरी 2026 को थी। उसी दिन प्रधानमंत्री मोदी जालंधर पहुंचे, जहां उन्होंने मंदिर में संत गुरु रविदास जी की पूजा-अर्चना की तथा संत निरंजन दास जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसी क्रम में आदमपुर एयरपोर्ट का नाम 'श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट' रखा गया। इसके अतिरिक्त, जालंधर प्रवास के दौरान समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए अमृतसर से वाराणसी के लिए संत गुरु रविदास जी को समर्पित एक विशेष ट्रेन का भी शुभारंभ किया गया। पूरे वर्ष भाजपा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार और संगठन के माध्यम से संत गुरु रविदास जी को समर्पित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। इस अभियान के लिए भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता को जोड़ा गया है तथा केंद्र से लेकर विभिन्न स्तरों तक अभियान के संचालन के लिए टोलियों का गठन किया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में सभी कार्यकर्ता इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाएंगे और प्रत्येक गांव को संत गुरु रविदास जी की जन्मस्थली की पावन मिट्टी से जोड़ेंगे।
--आईएएनएस
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